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दुनिया

सत्यार्थी और मलाला को नोबेल

बाल मजदूरी के खिलाफ संघर्ष करने वाले भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला युसूफजई को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

कैलाश सत्यार्थी जहां 60 साल के हैं और लंबे समय से इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं वहीं मलाला सिर्फ 17 साल की हैं और पाकिस्तान सहित दुनिया भर में लड़कियों की शिक्षा के अधिकार और समानता के अधिकार के लिए गहन लड़ाई लड़ रही हैं. वह नोबेल शांति पुरस्कार पाने वालों में सबसे युवा हैं. पाकिस्तान में तालिबान के फतवे के खिलाफ स्कूल निकली मलाला पर 2012 में कट्टरपंथियों ने जानलेवा हमला किया. लंबे संघर्ष के बाद वे जीवित बच गईं और आज पूरी ताकत के साथ लड़कियों के लिए शिक्षा के अधिकार की पैरवी कर रही हैं. नोबेल समिति ने कहा, "उनकी कम उम्र के बावजूद उन्होंने उदाहरण दिया है कि बच्चे और युवा अपने हालात सुधारने के लिए खुद भी योगदान दे सकते हैं. और बहुत ही मुश्किल परिस्थितियों में उसने ये कर दिखाया है."
कैलाश सत्यार्थी को नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा करते हुए कमेटी ने कहा, "वह ऐसे व्यक्ति हैं जो बाल मजदूरी खत्म करने की लड़ाई में सबसे अगली पंक्ति में खड़े हुए." कमेटी ने इस संघर्ष में मिली सफलताओं को रेखांकित किया. उन्होंने कहा, "नोबेल कमेटी हिन्दू और मुस्लिम, भारतीय और पाकिस्तानियों के लिए इसे अहम बिंदु के तौर पर देखती हैं कि दोनों शिक्षा और चरमपंथ के खिलाफ साझा लड़ाई लड़ें. आंकड़ा है कि दुनिया में आज भी सोलह करोड़ अस्सी लाख बाल मजदूर हैं. साल 2000 में यह संख्या 78 करोड़ थी. दुनिया बाल मजदूरी खत्म करने की दिशा में जा रही है."
भारत में बाल मजदूरी को रोकने के लिए लंबे समय से काम कर रहे कैलाश सत्यार्थी ने नोबेल पुरस्कार मिलने की घोषणा पर कहा, "यह उन बच्चों के लिए सम्मान है जो गुलामी, बंधुआ मजदूरी और तस्करी से पीड़ित हैं." कैलाश सत्यार्थी भारत में बचपन बचाओ आंदोलन से जुड़े हुए हैं. साथ ही बाल मजदूरी के खिलाफ ग्लोबल मार्च के प्रमुख हैं. यह मार्च 2,000 अलग अलग सामाजिक संस्थाओं और संगठनों से मिल कर बना है और 140 देशों में फैला हुआ है.
कैलाश सत्यार्थी ने व्यापारियों, खान मालिकों और जमींदारों के हाथों से हजारों बाल मजदूरों को छुड़ाया है. उन्होंने अपने अभियान की सफलता का श्रेय भारत के जीवंत और जोशीले लोकतंत्र को दिया. उन्होंने कहा, "एक अभियान जो भारत में पैदा हुआ और अब वैश्विक हो गया है. और अब बाल मजदूरी के खिलाफ वैश्विक अभियान चल रहा है. इस अवॉर्ड के मिलने के बाद मुझे लगता है कि दुनिया भर के बच्चों पर और ज्यादा लोगों का ध्यान जाएगा."
नोबेल पुरस्कार परंपारगत रूप से 10 दिसंबर को प्रदान किया जाता है. मलाला युसूफजई और कैलाश सत्यार्थी को यह पुरस्कार नॉर्वे की राजधानी ऑस्लो में दिया जाएगा.

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