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ब्लॉग

सच का आइना दिखाता शरणार्थी संकट

शरणार्थी संकट में अब तक यूरोपीय संघ का रवैया एकजुटता और वैर का मिला जुला रूप रहा है. यूरोप को बेहतर होने की जरूरत है. ग्रैहम लूकस का कहना है कि आने वाले हफ्तों में उसका रुख उसका भविष्य तय करेगा.

मैंने अपने को हमेशा किसी एक देश का नागरिक होने के बदले यूरोपीय नागरिक समझा है. 1970 और 80 के दशक में मैंने यूरोपीय एकता के विचार को राजनीतिक और आर्थिक रूप से बहुत आकर्षक विचार पाया. मेरी पीढ़ी के बहुत से लोग अभी भी मानते हैं कि यूरोपीय एकता युद्ध के खिलाफ सबसे बड़ी गारंटी है. साथ ही घरेलू बाजार और सामाजिक कल्याण व्यवस्था उच्च स्तरीय जीवन की गारंटी हैं. लेकिन प्रगति में कमी और सुधारों की धीमी गति परेशान करने वाली है. पिछले पचास साल का इतिहास दिखाता है कि यूरोपीय संघ संकट के समय में सही प्रतिक्रिया नहीं दिखाता है. राजनीतिक फैसले की प्रक्रिया धीमी और कठिन है. जहां संभव हो मुश्किल फैसले टाल दिए जाते हैं. बहुत से यूरोपीय अब महसूस करने लगे हैं कि यूरोप तभी फैसले लेता है जब और कोई चारा नहीं रह जाता.

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ग्रैहम लूकस

और अब एक नया संकट. इस बार पिछले सालों का सबसे बड़ा संकट सामने है. इस समय यूरोप द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा शरणार्थी संकट का सामना कर रहा है. शरणार्थियों के लिए यूरोप में दाखिल होने की बाधाएं अत्यंत कठिन और अक्सर जानलेवा हैं. हमें स्वीकार करना होगा कि सीरिया, इराक और दूसरे देशों के शरणार्थियों को मानव तस्करों के अपराधी गैंग यूरोप भेज रहे हैं. इस प्रक्रिया ने बहुत से लोगों को भारी तकलीफ दी है और हजारों जानें ली हैं.

जर्मनी अपनी ओर से ऐसी उदारता है जिसका यूरोप में कोई सानी नहीं है. इस साल यहां 8 लाख से 10 लाख शरणार्थी आएंगे. दूसरी ओर पोलैंड और हंगरी जैसे दूसरे यूरोपीय देश या तो मदद करने से इंकार कर रहे हैं या उनकी दिलचस्पी शरणार्थियों को दूसरे देशों में भेजने में है. ग्रीस और इटली जैसे देश इतनी बड़ी संख्या में आ रहे शरणार्थियों से निबटने की हालत में नहीं हैं. ब्रिटेन के हृदय में परिवर्तन दिख रहा है, लेकिन काफी देर से.

बड़ी समस्या यह है कि असली शरणार्थियों में बाल्कान से आने वाले ऐसे शरणार्थी भी शामिल हो रहे हैं जो बेहतर जिंदगी चाहते हैं. इसका मतलब है कि सच्चाई की घड़ी आ गई है. यूरोप को घटती आबादी का मुकाबला करने के लिए आप्रवासन नीति बनाने की जरूरत है. लेकिन उसकी शरणार्थी नीति भी ऐसी होनी चाहिए जो बोझ डाले बिना जिम्मेदारियों को पूरा करने की संभावना दे. यूरोपीय संघ के नेताओं को अब एकजुटता और भरोसे की भावना में फैसला करना होगा कि हमें किस तरह के आप्रवासन की जरूरत है और शरणार्थियों के बोझ को किस तरह आपस में बांटा जा सकता है. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी संस्था के प्रमुख अंटोनियो गुटेरेस ने इसे यूरोपीय संघ के लिए निर्णायक घड़ी बताया है. वे एकदम ठीक कह रहे हैं.

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