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खेल

सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न

22 गज की पिच के पर्याय बन चुके साढ़े पांच फीट के सचिन तेंदुलकर सिर्फ 40 साल में सभी रिकॉर्डों से एक कदम आगे बढ़ गए. क्रिकेट की दुनिया में अमिट छाप छोड़ देने वाले मास्टर ब्लास्टर को आज भारत रत्न से नवाजा गया.

पांच साल बाद किसी को भारत रत्न दिया जा रहा है. सचिन तेंदुलकर के साथ मशहूर वैज्ञानिक सीएनआर राव को भी यह सम्मान दिया गया. इससे पहले मशहूर गायक भीमसेन जोशी को 2009 में भारत रत्न दिया गया था. सचिन तेंदुलकर यह सम्मान पाने वाले सबसे कम उम्र की शख्सियत हैं.

वह भारत के पहले खिलाड़ी हैं, जिन्हें यह सम्मान दिया जा रहा है. हालांकि चर्चा हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद के नाम की भी थी. खेल मंत्रालय ने उनके नाम की सिफारिश भी की थी, लेकिन पिछले साल अपना 200वां टेस्ट मैच खेलने वाले सचिन ने सिर्फ दो दिन में ध्यानचंद को पछाड़ दिया.

आनन फानन अवार्ड

सूचना के अधिकार के तहत हासिल दस्तावेज से पता चला है कि जब सचिन तेंदुलकर ने 14 दिसंबर, 2013 को अपना आखिरी मैच खेलना शुरू किया, तब तक भारत रत्न की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई थी. लेकिन दो दिन के अंदर सरकार ने यह फैसला ले लिया और तीन दिन में मैच खत्म होते होते इस बात का एलान भी कर दिया गया कि सचिन को भारत रत्न दिया जाएगा. पुरस्कार समारोह से ठीक पहले मिली इस जानकारी के मुताबिक, "प्रधानमंत्री कार्यालय ने 14 नवंबर को खेल मंत्रालय को एक फैक्स भेजा, जिसमें सचिन तेंदुलकर का बायो डाटा मांगा गया." दोपहर बाद के इस फैक्स का जवाब उसी दिन खेल मंत्रालय ने चार घंटे के अंदर दे दिया. इस बीच सचिन के घरेलू पिच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में वेस्ट इंडीज के खिलाफ टेस्ट मैच शुरू हो चुका था.

आरटीआई यानी सूचना के अधिकार के मुताबिक, "अगले दिन 15 नवंबर को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर लीं और यह प्रस्ताव राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास भेज दिया गया." 16 नवंबर को जब टेस्ट खत्म हुआ तो उसके साथ ही सचिन को भारत रत्न दिए जाने का एलान हो गया. औपचारिक तौर पर प्रधानमंत्री ने एक चिट्ठी 17 नवंबर को भेजी. इस बीच एक दिन राहुल गांधी ने भी मुंबई जाकर सचिन का मैच देखा.

ध्यानचंद किनारे

सूचना अधिकार के तहत जानकारी हासिल करने वाले हेमंत दुबे हॉकी प्रेमी हैं और कैंसर पीड़ित हैं. उन्होंने 27 नवंबर को ही यह जानकारी मांगी थी. दुबे हॉकी के पूर्व खिलाड़ी ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग करते आए हैं. उन्हें 17 जनवरी की तारीख में 14 पन्नों में जवाब दिया गया. इस मामले में कुछ जानकारियों को सार्वजनिक नहीं किया गया है. प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है, "प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच का संवाद गोपनीय है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 74 (2) के तहत इसका खुलासा नहीं किया जा सकता है."

क्रिकेट से दूर होने के बाद सचिन तेंदुकर थोड़ा बहुत विवादों में भी फंसे हैं. वह फिलहाल राज्यसभा के सांसद हैं और मद्रास हाई कोर्ट में उनकी सदस्यता को लेकर मुकदमा चल रहा है. याचिकाकर्ता ए बेनिटो ने अदालत से पूछा है कि किस नियम के तहत सचिन को राज्यसभा सांसद बनाया गया.

बहरहाल, मंगलवार को इन बातों को भुला कर सचिन तेंदुलकर को भारत का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान दिया जा रहा है. अब से पहले सिर्फ 41 लोगों को यह सम्मान दिया गया है, जिनमें दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला भी शामिल हैं.

एजेए/आईबी (पीटीआई)

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