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दुनिया

सऊदी से "मध्यकालीन" सजा वापस लेने की अपील

ब्लॉगर रइफ बदावी की 1,000 कोड़ों की सजा रोकने के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ ने सऊदी अरब से अपील की है. स्वीडन की विदेश मंत्री मारगॉट वालस्ट्रोम ने सजा को "मध्यकालीन" बताया है.

ब्रसेल्स में स्वीडिश रेडियो से बात करते हुए वालस्ट्रोम ने कहा, "मेरे विचार में यह एक मध्यकालीन सजा है. यह पुराने जमाने का एक ऐसा तरीका है जिसकी आज के समाज में, जहां मीडिया के पास स्वतंत्रता है और जो लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी देता है, वहां इसकी कोई जगह नहीं है."

रइफ बदावी को कथित रूप से इस्लाम का अपमान करने के आरोप में यह सजा दी गयी है. नवंबर 2014 में उन्हें एक हजार कोड़ों और दस साल की कैद की सजा सुनाई गयी थी. इसके बाद इस साल जनवरी में उन्हें 50 कोड़े मारे गए. हर हफ्ते ऐसा होना था लेकिन स्वास्थ्य संबंधी कारणों से कोड़ों की सजा टलती रही. इस बीच मामला सऊदी के सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा और इस रविवार अदालत ने सजा को बरकरार रखने का फैसला सुनाया.

स्वीडन की विदेश मंत्री ने जनवरी में भी इस सजा के खिलाफ टिप्पणी की थी. इसके जवाब में सऊदी सरकार ने स्टॉकहोम से अपने राजदूत को वापस बुला लिया था. वालस्ट्रोम ने उस समय संसद में कहा था कि सऊदी अरब महिलाओं के अधिकारों का हनन करने वाला और ब्लॉगरों को कोड़े मारने वाला तानाशाह देश है. वहीं सऊदी ने इसे अपने अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप बताते हुए स्वीडन की निंदा की. दोनों देशों के बीच तनाव इतना बढ़ा कि स्वीडन ने सऊदी अरब के साथ होने वाले सैन्य समझौते को रोक दिया और सऊदी अरब ने अरब लीग में मानवाधिकारों पर दिए जाने वाले वालस्ट्रोम के भाषण पर रोक लगा दी. कई हफ्तों तक चली राजनयिक प्रक्रिया के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार आया.

बर्बर सजा

वहीं अमेरिका ने भी बदावी की सजा की निंदा करते हुए इस मामले पर "गहरी चिंता" व्यक्त की है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "जैसा कि हमने पहले जनवरी में भी कहा था, अमेरिकी सरकार सऊदी अरब से इस बर्बर सजा को खारिज करने और बदावी के मामले पर फिर से विचार करने की अपील करती है. हम ऐसे कानूनों की कड़ी निंदा करते हैं जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अनुमति नहीं देते." इससे पहले यूरोपीय संघ ने भी सजा खारिज करने की अपील करते हुए एक बयान में कहा, "इस तरह की शारीरिक सजा अस्वीकार्य है और मानवता के विरुद्ध है. हम एक बार फिर सऊदी अधिकारियों से बदावी की सजा पर विचार करने की अपील करते हैं."

31 साल के रइफ बदावी सऊदी लिबरल नेटवर्क इंटरनेट नाम की वेबसाइट चलाते थे, जिस पर सामाजिक मुद्दों पर बहस की जाती थी. 2012 में साइबर क्राइम के आरोपों के तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया और अदालत ने वेबसाइट बंद करने के आदेश दिए. गौरतलब है कि सऊदी अरब में शरिया कानून चलता है और बदावी कानूनी प्रक्रिया में धर्म के हस्तक्षेप के खिलाफ लिखा करते थे. पिछले साल उन्हें रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस साल उन्हें डॉयचे वेले के फ्रीडम ऑफ स्पीच पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

आईबी/एमजे (डीपीए, एएफपी)

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