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दुनिया

सऊदी में मजदूरों का बुरा हाल

दुनिया भर के बेरोजगारों के लिए सऊदी अरब सालों से रोजगार का ठिकाना है लेकिन नए नियमों के बाद मजदूरों को देश छोड़कर जाना पड़ रहा है. यहां तक कि खून खराबा भी हो रहा है.

मदीना में पैगंबर मुहम्मद की मजार के पास की मस्जिद के बाहर वाली सड़क पर कूड़े का अंबार लगा है. किराने की दुकानें बंद हैं. सऊदी अरब में काम करने वाले करीब आधी कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने अपने प्रोजेक्टों पर काम धीमा कर दिया है. यह स्थिति ऐसी इसलिए है क्योंकि विदेशी कामगार, जिन पर ये सारे काम निर्भर हैं, वे सऊदी अरब से खौफ में भाग रहे हैं या डर से छिप गए हैं या फिर गिरफ्तार होने के बाद जेल में बंद हैं.

सऊदी अरब ने गैरकानूनी ढंग से रहने वाले विदेशियों को पकड़ने के लिए इस साल की शुरूआत से सख्त अभियान छेड़ा है. सऊदी अरब ने निताकत नीति को सख्ती से लागू किया है जिसके तहत सऊदी नागरिकों को रोजगार का अधिकार मिलता है. इस अभियान से सऊदी अरब में काम करने वाले करीब 90 लाख मजदूर घेरे में हैं. दशकों से लचर प्रवासी कानून की वजह से विदेशी कामगार सस्ती मजदूरी और सेवा से जुड़े काम करते आ रहे हैं. आरामपसंद सऊदी नागरिक आम तौर पर इन कामों को नहीं करते.

Zum Thema - Zwei Tote bei Krawallen illegaler Einwanderer in Saudi-Arabien

सऊदी में काम करने के लिए सही दस्तावेज जरूरी

अब अधिकारियों का कहना है कि विदेशी मजदूरों को निकाल देने से नागरिकों के लिए नई नौकरियां पैदा होंगी. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक अभी तक सऊदी अरब में बेरोजगारी दर 12.1 फीसदी है. लेकिन राष्ट्रवादी इस कदम से बेहद जोश में हैं. इस साल जब सऊदी सरकार ने विदेशी मजदूरों को लेकर चेतावनी जारी की तब से लाखों विदेशी मजदूरों को देश से निकाल दिया गया.

रोजगार के लिए सख्त कानून

हालांकि कई मजदूर गिरफ्तारी से बचने के लिए माफी कार्यक्रम के तहत अपने दस्तावेज दुरुस्त करने में कामयाब रहे. यह कार्यक्रम पिछले हफ्ते बंद हो गया और करीब 33,000 लोग अब तक सलाखों के पीछे जा चुके हैं. कुछ लोग छिप गए हैं. सरकारी समाचार पत्रिका 'अरब न्यूज' के मुताबिक काम के लिए लोग नहीं हैं और इस वजह से करीब 20,000 स्कूलों में सफाई कर्मचारी की कमी है. दूसरे स्कूलों में बस ड्राइवर नदारद हैं. अरब न्यूज की वेबसाइट के मदीने की मजार के पास इतना कूड़ा जमा हो गया है कि शहर के आला अधिकारी को सड़क की सफाई करनी पड़ी.

मध्य पूर्व के व्यापार, उद्योग और अर्थशास्त्र महासंघ के अध्यक्ष खलफ अल उतैबी के मुताबिक, ''सऊदी अरब में करीब 40 फीसदी निर्माण कंपनियों को अपना काम सिर्फ इसलिए रोकना पड़ा क्योंकि विदेशी मजदूरों को समय पर वीजा नहीं मिल पाया.'' सऊदी अरब के नागरिकों के मुताबिक बेकरी, सुपर बाजार, पेट्रोल पंप और कॉफी शॉप जैसे दर्जनों कारोबार बंद हैं. उनके मुताबिक मिस्त्री, बिजली मिस्त्री और नलकार की सेवाएं महंगी हो गई है. मध्य पूर्व में ह्यूमन राइट्स वॉच के एडम कुगल के मुताबिक, ''अगर सरकार को इस समस्या को लेकर गंभीर होना है तो अधिकारियों को श्रम कानून को देखना चाहिए न कि मजदूरों को.''

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