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दुनिया

सऊदी प्रिंस को मृत्युदंड से शाह सलमान पर बढ़ेगा भरोसा?

सऊदी अरब में पिछले दिनों एक राजकुमार को मृत्युदंड दिए जाने के मामले को देश में समानता के प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा है. माना रहा है कि ये फैसला सऊदी शाही परिवार पर जनता के भरोसे को मजबूत करेगा.

तेल के दामों में गिरावट के चलते सऊदी अरब ने खर्चों में कटौती करने के लिए कई सख्त फैसले लिए हैं. इनमें कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में कटौती भी शामिल है जिससे आम लोगों की जिंदगी प्रभावित हुई है. लेकिन हत्या के मामले में पिछले दिनों सऊदी प्रिंस तुर्की बिन सऊद अल कबीर को मौत की सजा दिए जाने के बाद सोशल मीडिया पर बहुत से लोग शाही परिवार की तारीफ कर रहे हैं. लोग प्रिंस तुर्की की मौत की सजा पर अमल के शाह सलमान के आदेश को "निर्णायक" और "निष्पक्ष" मान रहे हैं.

सऊदी शिक्षाविद् और शाही परिवार के एक सदस्य खालिद अल सऊद ने ट्विटर पर लिखा, "ये सर्वशक्तिमान अल्लाह का कानून है और ये हमारे भाग्यशाली राष्ट्र की सोच है." वहीं एक सऊदी पत्रकार नासिर बिन फैरो ने लिखा, "इस्लामी राष्ट्र का इंसाफ पंसद शासक जो इस्लामी कानून के मुताबिक चलता है."

देखिए मौत की सजा के वीभत्स तरीके

सोशल मीडिया पर किंग सलमान के पुराने भाषणों को शेयर किया जा रहा है जिसमें वो कह रहे हैं कि अगर शाही परिवार के सदस्य कुछ गलत करते हैं तो नागरिकों को उनके खिलाफ मुकदमा करने से डरना नहीं चाहिए. रियाद में सोफा मस्जिद के इमाम मोहम्मद अल मसलूकी कहते हैं कि प्रिंस तुर्की के मामले में पीड़ित परिवार ने करोड़ों रियाल की "ब्लड मनी" लेने इनकार कर दिया था. उन्होंने ट्वीट किया, "अल्लाह गरीब और अमीर या फिर एक राजकुमार और एक गरीब आदमी में कोई फर्क नहीं करता है."

लेकिन जेद्दाह में एक यूनिवर्सिटी छात्र का कहना है कि शाही परिवार के लोगों के खिलाफ आम तौर पर जिस तरह कोई कार्रवाई नहीं होती, उससे लोगों में हताशा है और इसी को देखते हुए ही शाह सलमान ने प्रिंस तुर्की को मृत्युदंड देने का आदेश दिया. सिर्फ अपना नाम बाहा बताने वाले इस छात्र ने कहा, "ये तो होना ही था. अपराध करने वाले शाही परिवार के सदस्यों को कब तक माफ किया जाता रहेगा."

देखिए आलोचना को दबाती सरकारें 

लेकिन सऊदी अधिकारियों का कहना है कि देश की न्याय व्यवस्था निष्पक्ष है. जाने माने सऊदी विश्लेषक जमाल खशोगी कहते हैं कि शाह सलमान के फैसले से लोग खुश हैं. उनके मुताबिक, "ये शरिया कानून के प्रति सम्मान का संकेत है. लोगों को ये पसंद आया." मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि सऊदी अरब में पिछले साल 2015 लोगों को मौत की सजा दी गई, जो 1995 के बाद से सबसे ज्यादा है. इस मामले में पहले स्थान पर चीन और दूसरे पर ईरान है.

एके/एमजे (रॉयटर्स)

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