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दुनिया

सऊदी अरब में फंसी एक और भारतीय महिला

विदेशी धरती पर पैसे कमाने के इरादे से पहुंचे एक और भारतीय कामगार के उत्पीड़न का मामला सामने आया है. इस बार हैदराबाद की एक महिला ने सऊदी अरब के एक परिवार के हाथों अत्याचार की शिकायत की है.

इस महिला का नाम है जबीन बेगम और यह हैदराबाद से 16 दिसंबर, 2015 को सऊदी अरब गयीं. एक डॉक्टर जोड़े ने उसे अपना घरेलू कामकाज करने के लिए रखा था. वहां पहुंचने के कुछ ही दिन बाद से महिला ने परेशान किये जाने और मारे पीटे जाने की शिकायत भारत में रहने वाले अपने भाई से की. उसके भाई मोहम्मद हमीद खान ने भारत में विदेश मंत्रालय को संपर्क कर इस घटना की जानकारी दी और बहन को वापस भारत लाये जाने का अनुरोध किया. महिला को काम पर रखने वाले उसे वापस भेजने को तैयार नहीं थे.

भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मामले पर तुरंत प्रतिक्रिया करते हुए सऊदी अरब में भारतीय दूतावास को जबीना बेगम की मदद करने के निर्देश दिये हैं.    

भारतीय दूतावास ने जब सऊदी अरब के इस परिवार बात की, तो वे जबीन बेगम को रमजान के महीने के बाद लौटाने को तैयार हो गये. लेकिन कुछ भारतीय अखबारों ने उनके भाई हमीद खान के हवाले से लिखा है कि इसके बाद जबीन ने एक वॉयस मैसेज भेजा है जिसमें इससे उलट बात कही. जबीन बेगम को लगता है कि वे लोग उसे कम से कम छह महीने और तक उसे वापस भारत नहीं भेजने वाले क्योंकि वे भारतीय दूतावास के संपर्क करने से नाराज हैं.

सऊदी अरब का रियाद स्थित भारतीय दूतावास समय समय पर भारत से वहां जाने वाले लोगों को आने वाले खतरों के प्रति जागरुक करने की कोशिश करता है. जैसे कि यह वीडियो जिसमें पैसे कमाने के लिए देश छोड़ने से पहले अपनी सुरक्षा और अच्छे भविष्य के लिए इन बातों का ख्याल रखने को कहा जाता है.  

जबीन बेगम जैसे कितने ही मामले हाल ही में सामने आए हैं. आम तौर पर दक्षिण भारत से ऐसी कई महिलाएं सऊदी अरब घरेलू कामकाज कर अच्छे पैसे कमाने के लिए जाती हैं. लेकिन कई महिलाओं को बंधुआ मजदूर जैसे रखा जाता है और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट भी होती है. इसी साल सामने आए ऐसी ही एक और मामले में भारतीय महिला को अपने मालिकों का विरोध करने पर इमारत से नीचे फेंक दिया गया और फिर घायल अवस्था में ही उस पर चोरी का आरोप लगाकर जेल में बंद करवा दिया गया था. ऐसी कई घटनाओं में प्रवासी पीड़ितों ने सऊदी पुलिस पर बाहर वालों से अमानवीय बर्ताव करने की शिकायत की है.

फिलहाल सऊदी एमनेस्टी के तहत ऐसे सभी भारतीय लोगों को जल्द से जल्द सऊदी अरब से बाहर निकलने के लिए जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है, जिनके पास वहां रहने के वैध कागज और कानूनन अनुमति नहीं है. यह अभियान 26 जून को खत्म हो रहा है.

गरीबी और कर्ज का बोझ कम करने के लिए कई लोग भारत जैसे देशों से सऊदी अरब का रुख करते हैं. खाड़ी सहयोग परिषद के देशों जैसे बहरीन, कुवैत, ओमान, यूएई और सऊदी अरब में इन्हें "अस्थायी" प्रवासी कामगारों के रूप में काम पर रखा जाता है. ऐसे लाखों एशियाई कामगार जो खाड़ी देशों में काम करते हैं. मानवाधिकार समूहों का कहना है कि इन मजदूरों का शोषण आम बात है और उनकी कहीं सुनवाई भी नहीं होती. सऊदी अरब के कफाला सिस्टम के तहत ज्यादातर विदेशी मजदूर अपना कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने से पहले अपने बॉस की अनुमति के बिना कहीं दूसरी जगह नौकरी नहीं कर सकते या वापस अपने देश भी नहीं जा सकते. मानवाधिकार समूह इसे एक तरह की बंधुआ मजदूरी या गुलामी कह कर इसकी आचोलना करते हैं.

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