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दुनिया

सऊदी अरब, मिस्र, यूएई ने तोड़ा कतर से नाता

मध्यपूर्व के अरब देशों में गंभीर मतभेद सामने आये. सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात ने कतर से संबंध तोड़ने की घोषणा की है. इन देशों ने कतर पर आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया है.

शक्तिशाली अरब देशों के बीच कई सालों में सामने आया यह सबसे बुरा विवाद है. एक देश के खिलाफ बाकियों की मिल कर की गयी यह कार्रवाई अपने आप में अनोखी है. कतर पर मुस्लिम ब्रदरहुड का समर्थन करने का आरोप लगा है, जो कि दुनिया का सबसे पुराना इस्लामी आंदोलन है. इसके अलावा दोहा पर अरब देशों के धुर विरोधी ईरान के एजेंडे का समर्थन करने का आरोप है.

कतर के साथ यातायात के रास्ते बंद करने की घोषणा करते हुए तीन खाड़ी देशों ने कतर के पर्यटकों और नागरिकों को अपने देशों से निकलने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है. यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाली सेना से भी कतर को निकाल दिया गया.

अबू धाबी से चलने वाली सरकारी एयरलाइंस इत्तिहाद एयरवेज ने अगले दिन से दोहा को जाने और वहां से आने वाली सभी उड़ानें स्थगित करने की घोषणा की है. सऊदी अरब का मानना है कि कतर आतंकी समूहों का समर्थन करता है और उनके आदर्शों का प्रचार करता है. माना जा रहा है कि उनका इशारा कतर के प्रभावशाली सरकारी चैनल अल जजीरा की ओर है. 2011 में अरब वसंत के दौरान भी कतर ने अपने मीडिया का इस्तेमाल कर लोकतंत्र के समर्थन में आवाज ऊंची की थी.

2013 में मिस्र में सेना के सत्ता अपने हाथ में ले लेने के बाद से वहां मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थक संकट में हैं. पूर्व सेना प्रमुख और अब देश के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी के अलावा, सऊदी अरब और यूएई ने भी ब्रदरहुड को एक आतंकवादी संगठन के रूप में ब्लैकलिस्ट कर दिया है.

2014 में भी सऊदी अरब, बहरीन और यूएई के साथ करीब आठ महीने तक कतर का विवाद चला था. तब भी आतंकी गुटों का समर्थन करने के आरोप में इन देशों ने दोहा से अपने राजदूत वापस बुला लिए थे. लेकिन यात्रा के रास्ते बंद नहीं हुए थे और ना ही इन देशों से कतरी नागरिकों को वापस लौटाने का आदेश जारी हुआ था.

मध्यपूर्व के देशों में इस विवाद का पूरे इलाके पर असर होगा. खाड़ी देश अपनी आर्थिक और राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल कर लीबिया, मिस्र, सीरिया, इराक और यमन में हिंसा और युद्ध की स्थिति को प्रभावित करते हैं. कतर में 2022 का फुटबॉल विश्व कप भी आयोजित होना है, इस घटना से उसकी अंतरराष्ट्रीय साख को भी नुकसान पहुंचेगा.

आरपी/एमजे (रॉयटर्स)

 

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