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ताना बाना

सउदी रिश्तों के लिए बेताब अंगेला मैर्केल

खाड़ी देशों की यात्रा के तहत जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल इस समय सउदी अरब में हैं. तेल उत्पादक, निवेशक, जर्मन उद्योग के ग्राहक के रूप में अहम भूमिका के साथ साथ मध्य पूर्व शांति प्रकिया में सउदी अरब एक प्रमुख साझेदार है.

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खाड़ी देशों की सहयोग परिषद में सउदी अरब के अलावा संयुक्त अरब अमीरत, कुवैत, ओमान, कतर और बहरीन शामिल हैं. परिषद के देशों के साथ मुक्त व्यापार के समझौते के लिए लगभग 20 वर्षों से यूरोपीय संघ के साथ बातचीत चल रही है. चांसलर मैर्केल ने अपनी यात्रा के दौरान कहा कि वह जल्द एक ऐसे समझौते के समापन के लिए कोशिश करेंगी.

जेद्दा में सउदी अरब के उद्योगपतियों की एक सभा को संबोधित करते हुए मैर्केल ने कहा कि वे नहीं चाहती हैं कि जब वह अगली बार वहां आएं, तो ऐसा समझौता संपन्न न हुआ हो. उन्होंने कहा कि अब भी अगर इसे संपन्न नहीं किया जाता है, तो म्युज़ियम में डाल देना चाहिए. इन देशों में मानव अधिकारों की स्थिति पर यूरोपीय संघ की आपत्तियों के कारण अब तक यह समझौता नहीं हो पाया है.

द्विपक्षीय संबंधों में बेहतरी के लिए चांसलर मैर्केल ने जर्मनी में सउदी यात्रियों के वीजा नियमों में ढील का संकेत दिया. सउदी अरब को शिकायत है कि ख़ासकर वैज्ञानिकों, व्यापारियों और रोगियों को अकसर कड़े नियमों का सामना करना पड़ता है. मैर्केल ने कहा कि इसकी व्यवस्था करनी पड़ेगी कि सउदी अरब को नौकरशाही का सामना न करना पड़े.

अंगेला मैर्केल ने सउदी अरब से अपील की कि वहां के साझेदारों के साथ जर्मनी के मंझले आकार के उद्यमों के संपर्क को आसान बनाया जाए. ख़ासकर ऐसे उद्यमों को स्थानीय सहयोग की ज़रूरत होती है, जो अकसर नहीं मिल पाता है. उन्होंने सउदी अरब में महिलाओं के अधिकार बढ़ाने की वकालत की. जर्मनी की पहली महिला चांसलर ने कहा कि यहां प्रगति तो हो रही है, लेकिन यह रफ्तार बहुत धीमी है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/उभ

संपादन: ए कुमार

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