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ताना बाना

सईद को पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट से मोहलत मिली

मुंबई हमले से जुड़े हाफ़िज़ सईद की नज़रबंदी के लिए पाकिस्तान की सरकार की अपील को देश के सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. बचाव पक्ष के वकील ने कहा है कि सरकार अपना पक्ष साबित करने में नाकाम रही है.

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सबूत काफ़ी नहीं

लश्कर ए तैयबा के संस्थापक व उसके बाद बने जमात उद दावा के अध्यक्ष हाफ़िज़ मोहम्मद सईद भारत और अमेरिका की राय में सन 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले से जुड़े रहे हैं. पिछले साल लाहौर की एक अदालत ने उनकी नज़रबंदी के आदेश को खारिज कर दिया था, जिसके ख़िलाफ़ पाकिस्तान सरकार व पंजाब की प्रदेश सरकार की ओर से याचिका दायर की गई थी. अब पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया है.

बचाव पक्ष के वकील ए के डोगर ने पत्रकारों को बताया कि न्यायाधीश नासिर उल मुल्क की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यों की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद लाहौर हाईकोर्ट के फ़ैसले को बरकरार रखने का पक्ष लिया. फ़ैसले को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ़ संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति की आज़ादी पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता.

सुरक्षा परिषद की ओर से जमात उद दावा को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने के बाद पाकिस्तान सरकार ने दिसंबर 2008 में सईद व उनके संगठन के तीन अन्य नेताओं को नज़रबंद कर लिया था.

भारत ने इस फ़ैसले पर अपनी निराशा व्यक्त की है. अदालत के फ़ैसले पर टिप्पणी करते हुए भारत की विदेश सचिव निरुपमा राव ने नई दिल्ली में कहा कि वह हाफ़िज़ सईद को मुंबई हमलों के सरगना में से एक मानती हैं और उसने खुले तौर पर भारत के ख़िलाफ़ जिहाद की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि हाफ़िज़ की भूमिका व गतिविधियों के बारे में पाकिस्तान को अनेक सबूत दिए गए हैं. आतंकवादियों को पनाह न देने के अपने वादे के मुताबिक पाकिस्तान को उसके ख़िलाफ़ सार्थक क़दम उठाने चाहिए.

रिपोर्ट: एजेंसियां/उभ

संपादन: महेश झा

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