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मनोरंजन

संयोग से फिल्मों में आईं यामी गौतम

चंडीगढ़ की कालेज छात्रा यामी गौतम ने अभिनय को करियर बनाने के बारे में सोचा तक नहीं था. लेकिन संयोग उन्हें यहां ले आया. उन्हें विकी डोनर से बालीवुड में ब्रेक मिला. डॉयचे वेले के साथ यामी गौतम का इंटरव्यू.

डॉयचे वेले: क्या आपने फिल्मों में करियर बनाने के बारे में सोचा था?
यामी: बचपन में मैं इस बारे में सोचती थी, लेकिन बाद में पढ़ाई में जुट गई. कालेज के दिनों में तो मैंने इस बात की कल्पना तक नहीं की थी. उसके बाद संयोग से एक टीवी सीरियल के लिए ऑडिशन में मेरा चयन हो गया. कुछ विज्ञापन फिल्मों में भी काम मिला. फिर धीरे-धीरे यह सिलसिला चल निकला.


विकी डोनर की विषय वस्तु को लेकर मन में कोई खटका नहीं हुआ?
सच कहूं तो पहले तो यह जानकर मन में आशंका हुई यह फिल्म एक स्पर्म डोनर के बारे में है. मैंने फिल्म हाथ में लेने से पहले अपने माता-पिता से इसके लिए अनुमति ली थी. उन दोनों को पटकथा बेहद पसंद आई. इसके अलावा मुझे इस बात का भरोसा था कि निर्देशक सुजीत सरकार ऐसी कोई फिल्म नहीं बनाएंगे जिसे समाज स्वीकार नहीं करे, इसलिए मैंने इसके लिए हामी भर दी.

विकी डोनर के बाद आपका जीवन कितना बदला है?
इस फिल्म की कामयाबी के बाद जीवन काफी व्यस्त हो गया है. मुंबई से लेकर दक्षिण भारत तक लगातार भागदौड़ करनी पड़ती है. लेकिन मैं देश में मनोरंजन के सबसे बड़े साधन सिनेमा का हिस्सा बन कर खुश हूं.


बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग में क्या अंतर है?
मुझे तो इन दोनों में भाषा के सिवा कोई खास अंतर नहीं महसूस होता. दक्षिण भारतीय निर्देशकों के साथ काम करना एक बढ़िया अनुभव है. दक्षिण भारतीय फिल्मोद्योग बेहद सुनियोजित, संगठित और कामकाज में पाबंद है. शुरूआत में भाषा की वजह से मुझे उन फिल्मों में काम करने में दिक्कत हुई थी. लेकिन मुझे लगता है कि जीवन में कुछ पाने के लिए आपको काफी मेहनत करनी होती है और अपना सर्वश्रेष्ठ देना होता है. अब मुझे वहां की फिल्में ज्यादा मुश्किल नहीं लगतीं.


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एक अभिनेत्री के तौर पर आप आगे क्या करना चाहती हैं?
मुझे स्टीरियोटाइप रोल पसंद नहीं हैं. मैं बिना सोचे-समझे फिल्में करने की बजाय बेहतर अभिनेताओं के साथ अच्छी फिल्में ही हाथ में लेना चाहती हूं. अभी तो मेरा सफर बस शुरू ही हुआ है.


किसी अभिनेता के साथ काम करने की दिली ख्वाहिश?
मैं अमिताभ बच्चन की बहुत बड़ी फैन हूं. उनके साथ काम करने का मौका मिला तो बेहद खुशी होगी. इसके अलावा खान और कपूर टाइटिल वाले अभिनेताओँ के साथ भी काम करना चाहती हूं.
आपने टीवी से सफर शुरू किया था. क्या निकट भविष्य में छोटे परदे पर लौटने की कोई योजना है?
मैं टेलीविजन की ताकत जानती हूं और उसकी आभारी भी हूं. वह माध्यम मेरे लिए सीखने व प्रयोग करने के लिए एक प्रयोगशाला की तरह था. लेकिन फिलहाल मैं अपने काम का आनंद उठा रही हूं. इसलिए फिलहाल वहां वापसी का इरादा नहीं है.


भावी योजनाएं क्या हैं?
अभी तो कई फिल्में हाथ में हैं. दक्षिण भारत की कुछ पिल्मों में भी काम कर रही हूं. तमिल व तेलुगू में बनी दो फिल्में जल्दी ही रिलीज होने वाली हैं. इनके अलावा प्रभुदेवा की अगली फिल्म की शूटिंग अगले महीने शुरू होगी. एक फिल्म अजय देवगन के साथ भी कर रही हूं. फिलहाल जीवन काफी व्यस्त है, लेकिन मैं हर पल इसका आनंद उठा रही हूं. मैं स्टार नहीं, बल्कि एक बेहतरीन अभिनेत्री के तौर पर खुद को स्थापित करना चाहती हूं. इस उद्योग में कामयाबी के लिए लगन और कड़ी मेहनत के साथ ही थोड़ा भाग्य भी जरूरी है.


इंटरव्यू: प्रभाकर, कोलकाता
संपादन: ओंकार सिंह जनौटी

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