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विज्ञान

संभलिए, कहीं एलर्जी न हो जाए

अंग्रेजी की एक कहावत आपने खूब सुनी होगी कि रोज एक सेब खाएंगे तो डॉक्टर से दूर रहेंगे. लेकिन क्या होगा जब यह सेब ही आपको डॉक्टर के पास पहुंचा दे. जी हां, ऐसा मुमकिन है. खाने पीने की किसी भी चीज़ से आपको एलर्जी हो सकती है.

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कोई बड़ी बात नहीं कि आपको इस बीमारी की खबर तक न हो. एलर्जिक रहिनाईटस या फिर कहिए हे फीवर. यह नाम है उस बीमारी का जो वसंत ऋतु में फूल खिलने के समय बहुत आम होती है. मज़े की बात यह है अपने नाम के विपरीत इसमें कोई फीवर यानी बुखार नहीं होता. लेकिन यह आपको खूब परेशान कर सकती है. सिर भारी होना, आंखों का लाल होना, बहती नाक, मुंह में छाले, सूजे हुए होंठ, यह सब इस एलर्जी के कारण हो सकता है.

पश्चिमी देशों में एलर्जी का ज़्यादा असर

हालांकि भारत में यह इतनी आम नहीं है, लेकिन अमेरिका और यूरोप जैसी ठंडी जगहों पर इसका काफी असर देखा गया है. अकेले अमेरिका में ही लगभग चार करोड़ लोगों में यह एलर्जी पाई जाती है. यूरोप में भी हर पांचवें शख्स में यह एलर्जी है.

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सुन्दर हैं पर खतरनाक भी

दरअसल पश्चिमी देशों में सर्दियां शुरू होने से पहले ही पतझड़ आ जाता है. सर्दियों के ख़त्म होने पर जब वसंत ऋतु आती है तो पेड़ों पर लगे रंग बिरंगे नए फूल देखने में तो बहुत सुंदर लगते हैं, लेकिन मन को लुभाने वाले इन फूलों में से निकलते हैं छोटे छोटे बीज जिन्हें पोलन ग्रेन या परागकण कहा जाता है. यह पोलन ग्रेन हवा में मिलकर चारों ओर फैल जाते हैं. इनके कारण नाक और गले में जलन और सांस लेने में दिक्कत भी आ सकती है.

ऐसा भी माना जाता है कि ज्यादा साफ सफाई वाले देशों में इस बीमारी का ज्यादा असर होता है. इसकी वजह यह है कि साफ़ वातावरण में रह कर शरीर की बीमारी से लड़ने की क्षमता यानी इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाता है, जिसके कारण शरीर बीमारियों का मुकाबला करने में बेबस महसूस करता है. शायद यही वजह है कि भारत में यह एलर्जी इतनी आम नहीं है. हां, बड़े शहरों में, जहां लोग अपना सारा दिन एयर कंडिशंड कमरों में बिताते हैं, वो बहुत आसानी से इस एलर्जी का शिकार हो जाते हैं.

बचा कर रखें खुद को

कई लोगों को तो यह सुझाव दिया जाता है कि वे इस मौसम में घर में ही रहें और खिड़की दरवाज़े बंद रखें. ऐसा इसलिए क्योंकि अपने घातक रूप में यह एलर्जी दमे का रूप भी ले सकती है. धीरे धीरे यह एलर्जी ऐसी शक्ल ले लेती है कि शरीर की रोग प्रतिरक्षण प्रणाली बीज वाले फलों और पोलन ग्रेन में अंतर करना बंद कर देती है.

SARS, Frauen mit Masken und Mobiltelefonen

एलर्जी के मौसम में मास्क के साथ ही बाहर जाएं

इसी कारण सेब, लीची, आड़ू, चैरी और स्ट्रॉबेरी जैसे सभी फलों से एलर्जी होने लगती है. इस बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए इंदौर के डॉक्टर राजेंद्र मेहता की सलाह है कि वे सीज़न आने से पहले अपने आपको तैयार करें. "अपने डॉक्टर के एंटी एलर्जिक दवाएं लेनी शुरू कर दें. नाक में एक तरह का फिल्टर भी लगा सकते हैं जिससे पोलन अंदर न जाएं." इसके अलावा बाहर जाते समय मुंह पर रूमाल या कोई मास्क लगाना भी ठीक रहता है.

रिपोर्टः ईशा भाटिया

संपादनः ए कुमार

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