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दुनिया

संदिग्ध जर्मन आतंकियों को पकड़ा

केन्या से आ रहे तीन संदिग्ध जर्मन आतंकियों को फ्रैंकफर्ट के हवाई अड्डे पर गिरफ्तार कर लिया गया. 23, 26 और 28 साल के इन युवकों पर अल शहाब के लड़ाके होने का आरोप है. अल शहाब सोमालिया में सक्रिय है.

गिरफ्तार युवकों पर आरोप हैं कि वह 2012 और 2013 के दौरान सोमालिया गए और कट्टरपंथी इस्लामी गुट अल शहाब से जुड़ गए. उन्हें मिलिशिया के ट्रेनिंग कैंप में हथियारबद्ध लड़ाई सिखाई गई और फिर गुट की लड़ाई में भी वह शामिल हुए. बयान में कहा गया है, "ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि इन आरोपियों ने ठोस हमले की योजना बनाई या फिर तैयारी की थी."

मिलिशिया

जर्मनी के दक्षिण पश्चिम रेडियो एसडबल्यू आर इन्फो के मुताबिक ये लोग जर्मनी इसलिए लौटे कि वे इस्लामी मिलिशिया की खूनी लड़ाई में आगे शामिल नहीं होना चाहते थे. जर्मनी के सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक अल शहाब सोमालिया की अंतरिम सरकार को गिराना चाहता है. और वहां शरिया कानून लागू करना चाहता है. इतना ही नहीं सोमालिया के आसपास के देशों में खिलाफत बनाना चाहता है. अल शहाब के लड़ाके सोमालिया की सीमा के आसपास भी लड़ रहे हैं. 2013 के सितंबर में केन्या की राजधानी नैरोबी में एक मॉल पर हमला भी अल शहाब के लड़ाकों ने ही किया था.

जर्मनी की चुनौती

इस्लामी कट्टरपंथियों की खबरें तेजी से बढ़ रही हैं और साथ ही ऐसे जर्मनों की भी जो धर्मांतरण कर जिहाद में शामिल हो रहे हैं. इस प्रक्रिया को जर्मन पुलिस और सरकार बहुत चिंता से देख रही है. हाल के दिनों में शरिया पुलिस वाला जैकेट पहन कुछ लोग जर्मनी की सड़कों पर निकल पड़े. संविधान की सुरक्षा के लिए बने विभाग के अंदाज के मुताबिक 43,000 लोग ऐसे हैं जो कट्टरपंथी गुटों से जुड़े हैं. यह संख्या लगातार बढ़ रही है और इनमें सलाफियों के साथ जाने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है, यह इस्लाम की अति रुढ़िवादी विचारधारा है. एक आंकड़े के मुताबिक करीब 6,000 लोग सलाफी विचारधारा से जुड़े हैं. नॉर्थ राइन वेस्टफेलिया में कोलोन, बॉन, वुपर्टाल, सोलिंगन इनमें खास हैं.

शरिया कानून

महिला पुरुष समानता को नकारने वाले सलाफी अक्सर पश्चिमी लोकतंत्र का विरोध करते हैं और इस्लामी कानून शरिया को ही सही मानते हैं. पिछले कुछ सालों में जर्मनी में कई सलाफी संगठनों पर प्रतिबंध लगाया गया है. इनमें 2012 के दौरान मिलातू इब्राहिम भी शामिल है. इसका प्रमुख बर्लिन का रैप गायक डेनिस कुसपैर्ट है.

जर्मनी लंबे समय से आतंकी हमलों का लक्ष्य रहा है. कई हमले या तो विफल किए गए या फिर फेल हो गए. इनमें मार्च 2011 की वह घटना भी शामिल है जिसमें एक युवक ने फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर दो अमेरिकी सैनिकों पर गोली चलाई. वर्तमान खतरा और गंभीर है. सुरक्षा अधिकारियों को चिंता उन जिहादियों से है जो सीरिया और इराक से लौट रहे हैं. 100 इस्लामिस्ट सीरिया से लौटे हैं. इनमें से 25 को हथियार चलाने का अनुभव है. संविधान सुरक्षा के लिए बने विभाग की उन पर नजर है. हालांकि ज्यादा डर अकेले कट्टरपंथियों से है क्योंकि उनके हमले का अंदाज नहीं लगाया जा सकता.

एएम/आईबी (डीपीए)

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