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मनोरंजन

संतान के लिए अमेरिका जाते चीनी

बड़ी संख्या में चीनी अमेरिका में किराए की कोख की मदद से संतान का सुख पा रहे हैं. जानकारों का कहना है चीन के लोगों में संतान पैदा करने की क्षमता घटती जा रही है.

सालों तक अमेरिकी दंपति चीन से बच्चे गोद लेते रहे. लेकिन अब मामला उल्टा है.

तीन साल पहले कैंसर को मात दे कर लौटी लगभग 40 साल की एक चीनी महिला को जब पता चला कि वह खुद मां नहीं बन सकती हैं तो उन्होंने विकल्प खोजने शुरू किए. नाम की गोपनीयता बनाए रखने की शर्त पर उन्होंने बताया कि उनमें मां बनने की क्षमता बची हुई है लेकिन चीन में किराए की कोख से बच्चा पैदा करना गैरकानूनी है. उन्होंने और उनके पति ने इसके लिए अमेरिका जाने का फैसला किया. पिछले साल वे लॉस एंजेलिस गए और इस समय उनके घर में तीन महीने के जुड़वां बच्चों की किलकारियां गूंज रही हैं.

उन्होंने अमेरिका से ही फोन पर कहा, "मैं हर चीज कायदे से करना चाहती थी. चीन में भी लुक छिप कर ऐसी संस्थाएं चलती हैं, लेकिन मुझे वहां के डॉक्टरों पर भरोसा नहीं." हालांकि अमेरिका में उन्हें डेढ़ लाख डॉलर का खर्चा आया, जो औसत चीनी नागरिक के वेतन से करीब 34 गुना ज्यादा है.

सरोगेसी में गर्भधारण करने वाली महिला का आम तौर पर बच्चे से रिश्ता नहीं होता. लेकिन बच्चे की पैदाइश में सरोगेट मां के अंडाणु भी इस्तेमाल हो सकते हैं. चीन के इस दंपति को डेढ़ लाख डॉलर का खर्च उठाना पड़ा. जाहिर है तरीका कीमती है और हर किसी के बस की बात नहीं.

अमेरिका में चल रही दर्जनों सरोगेसी एजेंसियों का कहना है कि उनके यहां चीनी ग्राहकों की संख्या पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है. कैलिफोर्निया के एनसीनो शहर की एजेंसी फॉर सरोगेसी सॉल्यूशंस ने हाल ही में अपने कांट्रैक्ट का चीनी भाषा में अनुवाद कराया. चीनी ग्राहकों की संभावना को देखते हुए वह चीनी भाषा के कांट्रैक्टर की मदद ले रही है.

एजेंसी की प्रमुख कैथरीन केकॉफ मैनोस ने बताया, "हमारे यहां एक तिहाई ग्राहक चीनी हैं. यह काफी बड़ी संख्या है. हमें हर दिन कॉल आती हैं."

लॉस एंजिलिस की मशहूर सरोगेसी एजेंसी ग्रोइंग जेनरेशंस के स्टुअर्ट बेल ने बताया, "ऐसा लगता है कि चीन में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है जो संतान नहीं पैदा कर सकते." चीनी जनसंख्या संघ के अनुसार करीब चार करोड़ लोग संतान पैदा करने में अक्षम हैं. यह बीस साल के आंकड़ों से चार गुना ज्यादा है.

शंघाई मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार शंघाई के मुख्य स्पर्म बैंक में आने वाला दो तिहाई वीर्य विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के स्तर के नहीं हैं. जानकार इसके लिए देश में बढ़ रहे प्रदूषण को जिम्मेदार मान रहे हैं.

अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि 60 से 70 फीसदी चीनी लोग सरोगेसी को चिकित्सीय कारणों से अपना रहे हैं. इसके अलावा समलैंगिक दंपति चीन में संतान गोद नहीं ले सकते. ऐसे जोड़े भी अमेरिका का रुख कर रहे हैं.

36 साल के टोनी जियांग ने अमेरिका में सरोगेसी की मदद से तीन बच्चों के बाद अब खुद अपनी सरोगेसी कल्टेंसी कंपनी खोल ली है. उन्होंने कहा, "यह कोई फैशन की तरह नहीं है, यह उन लोगों के लिए है जो जरूरतमंद हैं."

सरोगेसी की मदद से अमेरिका में पैदा होने वाले बच्चों को कुछ और फायदे भी मिलते हैं. एक तो उन्हें अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है. और दूसरी बात यह कि सरोगेसी के जरिए बच्चे पैदा होने में जुड़वां या तीन बच्चों के एक साथ पैदा होने की भारी संभावना होती है.

रिपोर्टः समरा फातिमा (एएफपी)

संपादनः ए जमाल

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