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दुनिया

संकट में कार शो रूम

कारों के लिए दुनिया भर में मशहूर जर्मनी में कारों के शो रूम संकट में हैं. ऑनलाइन खरीदारी और कार शेयरिंग की वजह से अगले छह साल में जर्मनी में हजारों कार शो रूम बंद हो जाएंगे. जर्मन युवा कार खरीदने से दूर भाग रहे हैं.

प्राइसवॉटरहाउसकूपर (पीडब्ल्यूसी) की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में कार शेयरिंग और सीधी ऑनलाइन खरीदारी कार बेचने के परंपरागत शो रूम तरीके को पीछे छोड़ देगी. बदलते रुझान की वजह से जर्मनी में कार डीलरों की संख्या एक तिहाई रह जाएगी. फिलहाल जर्मनी में 7,800 कार डीलर हैं, 2020 तक इनमें से 4,500 से कम ही प्रतिस्पर्धा में टिके रह पाएंगे.

ये रिपोर्ट कार कंपनियों के लिए भी चेतावनी की घंटी बजा रही है. शोध में पता चला है कि जर्मनी के युवाओं की कार खरीदने में दिलचस्पी घट रही है. वो कार शेयरिंग कंपनियों की गाड़ियां साझा करने में ज्यादा दिलचस्पी लेने लगे हैं. इस वजह से बिक्री गिरने लगी है.

पीडब्ल्यूसी के साझेदार फेलिक्स कुहनेर्ट मानते हैं कि कारों और ग्राहकों को रिश्ता बदलने जा रहा है. कुहनेर्ट के मुताबिक अब लोग कार तभी चाहते हैं जब उन्हें वाकई में उसकी जरूरत पड़ती है. कारोबार में बने रहने के लिए कार डीलरों को कार बेचने से ज्यादा जरूरत के वक्त गाड़ी मुहैया कराने के बारे में सोचना होगा.

Bildergalerie Bundespreis EcoDesign

कार शेयरिंग का बढ़ता चलन

कुहनेर्ट कहते हैं, "जो लोग शहर में रह रहे हैं उन्हें कार की अक्सर जरूरत नहीं पड़ती है और अकेले लोग मुश्किल से ही बड़ी गाड़ी पसंद करते है. इसकी वजह से छोटी कारों और वैकल्पिक ईंधन से चलने वाली कारों की मांग बहुत बढ़ेगी."

शहरों की बिक्री के गिरते रुझान की भरपाई ग्रामीण इलाकों से नहीं की जा सकती. इसका कारण बताते हुए कुहनेर्ट कहते हैं, "ग्रामीण इलाकों में आबादी घट रही है, इसका मतलब है कि वहां रहने वाले खास उम्र के लोगों को इधर उधर जाने की इतनी जरूरत नहीं पड़ती है."

रिपोर्ट के मुताबिक अगले छह सालों में जो कार कंपनियां और डीलर खुद को बदलते बाजार के मुताबिक नहीं ढाल पाएंगे, उन्हें जर्मन बाजार में खासा नुकसान उठाना पड़ेगा. इस रुझान के संकेत अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन में भी दिखाई पड़ने लगे हैं. यह भी एक वजह है कि नामी कार कंपनियां ब्राजील, मेक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, भारत और चीन के बाजार पर छा जाना चाहती हैं.

ओएसजे/एनआर (डीपीए)

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