1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

श्रीलंका पर मानवाधिकार हनन के ताजा आरोप

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने श्रीलंका पर तमिल विद्रोहियों के खिलाफ संघर्ष में मानवाधिकारों के हनन के ताजे आरोप लगाए हैं. इस हफ्ते जांच संबंधी मसौदे पर मतदान के बाद देश में युद्ध अपराधों के जांच की संभावना है.

अमेरिकी नेतृत्व में तैयार एक मसौदे में हजारों तमिलों की मौत की जिम्मेदारी तय करने की मांग को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का समर्थन मिलना तय लगता है. इस संघर्ष से संबंधित संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों में पहले भी श्रीलंकाई सेना और विद्रोहियों द्वारा मानवाधिकारों के हनन की बात कही जी चुकी है.

पश्चिम की चाल

सालों तक तमिल विद्रोहियों और सेना के बीच चले संघर्ष में मई 2009 में सेना की जीत हुई. देश के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का मानना है कि पश्चिम द्वारा श्रीलंका को निशाना बनाया जा रहा है. राष्ट्रपति छोटे देशों का समर्थन बटोरने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि खुद अधिकारियों का मानना है कि यह देखते हुए कि पड़ोसी भारत भी अमेरिका का साथ दे रहा है, यह बड़ी चुनौती है.

श्रीलंका चीन और रूस से मदद की उम्मीद करता है जो सुरक्षा परिषद के मसौदे को रोक सकते हैं लेकिन इन दोनों राष्ट्रों के पास भी मानवाधिकार परिषद के फैसलों को रोकने की वीटो ताकत नहीं है, जहां साधारण बहुमत फैसले के लिए काफी है.

Wahl in Sri Lanka, Präsident Mahinda Rajapakse

राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का मानना है कि पश्चिम द्वारा श्रीलंका को निशाना बनाया जा रहा है.

मसौदे पर मतदान

जेनेवा में तैयार मसौदे में मानवाधिकार प्रमुख नवी पिल्लई से श्रीलंका में दोनों पक्षों द्वारा मानवाधिकारों के कथित हनन के मामलों की विस्तृत जांच की मांग की गई है. इस पर फैसला इस हफ्ते 47 सदस्यीय परिषद में मतदान के आधार पर होगा.

कूटनीतिज्ञों के अनुसार कोलंबो अब तक जिम्मेदारी लेने से पल्ला झाड़ता रहा है. ऐसा लगता है कि मानवाधिकार के मामले में सुधार के उसके वादे भी अब ज्यादा कारगर नहीं रहे. संघर्ष खत्म होने के बाद से अब तक इस दिशा में कोई खास सुधार नहीं पाया गया है. मानवाधिकारों की निगरानी करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का कहना है कि संघर्ष खत्म होने के बाद से स्थिति और खराब ही हुई है.

पिछले हफ्ते दो प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की आतंकवाद विरोधी कानून के अंतर्गत गिरफ्तारी की घटना की दुनिया भर में निंदा हुई. पिछले दिनों पादरी प्रवीण महेसन और उनके साथी कार्यकर्ता की युद्ध में जान गंवाने वालों के परिवारों से मिलने पर गिरफ्तारी हुई. इसके बाद कोलंबो में अमेरिकी दूतावास ने बयान में कहा, "ताजा मामलों के आधार पर हम इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि मानवाधिकार परिषद द्वारा विस्तृत जांच जरूरी है." हालांकि श्रीलंका के अधिकारियों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र का यह कदम उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप जैसा है.

एसएफ/एमजे (एएफपी)