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खेल

श्रीलंका ने हमें धो डाला: धोनी

श्रीलंका से हारने और वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने बल्लेबाज़ों की क्लास ली. धोनी ने कहा, हम अपनी क्षमता के मुताबिक नहीं खेले. आलोचकों ने कहा, टीम इसी हार के लायक थी.

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मैच के बाद टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा, ''श्रीलंका ने काफी अच्छी गेंदबाज़ी की. उन्होंने हमारे लिए हालात बहुत कठिन बना दिए थे.'' भारतीय बल्लेबाज़ों की लाचारगी का खुला इज़हार करते हुए धोनी ने यह भी कहा, ''बल्लेबाज़ी हमारी ताकत है. लेकिन हमने अपनी क्षमता के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया. श्रीलंका ने आख़िर के 4-5 ओवर में कसी हुई गेंदबाज़ी की.''

भारत श्रीलंका के ख़िलाफ़ आख़िरी पांच ओवर में सिर्फ़ 29 रन ही बना सका. धोनी और युसूफ़ पठान क्रीज़ पर थे और रोहित शर्मा और हरभजन सिंह जैसे बल्लेबाज़ बारी का इंतज़ार कर रहे थे. श्रीलंका की तारीफ़ करते हुए माही ने कहा, ''अगर विपक्ष आपको धो दे तो आप क्या कर सकते हैं.''

वैसे भारतीय कप्तान के पास अब ईमानदारी से सच्चाई स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प भी नहीं बचा है. सवाल बीसीसीआई का गिरेबान भी ताक रहे हैं. आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि आख़िर किस आधार पर वर्ल्ड कप के लिए टीम चुनी गई. यूसुफ़ पठान और रवींद्र जडेजा को चुना गया या ढोया गया. सवाल युवराज सिंह जैसे सीनियर खिलाड़ी पर भी उठ रहे हैं.

Indisches Cricket Team

यह बात पहले से पता थी कि वेस्ट इंडीज़ में गेंद उछाल लेती है. श्रीसंत ऐसे विकेटों पर शानदार गेंदबाज़ी करते है लेकिन उन्हें टीम में जगह नहीं मिली. रॉबिन उथप्पा टी-20 के विशेषज्ञ बल्लेबाज़ हैं लेकिन उन्हें भी नज़र अंदाज़ किया गया. आईपीएल की वजह से वीरेंद्र सहवाग इस बार भी टी-20 वर्ल्ड कप नहीं खेल पाए, इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है. ऐसे कई सवालों का जवाब अब टीम मैनेजमेंट को देना हैं.

लगातार दूसरे टी-20 वर्ल्ड कप के ख़राब प्रदर्शन ने आलोचकों को नया मुद्दा दे दिया है. आलोचक कह रहे हैं कि कैरेबियाई धरती ने भारतीय क्रिकेट को आईपीएल की चकाचौंध से निकालकर सच्चाई दिखा दी है. आईपीएल में खेलने वाले नानेस, वाटसन, हसी, टैट, जयवर्धने, मलिंगा और मैथ्यूज़ जैसे विदेशी खिलाड़ी अब वर्ल्ड कप में भी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. लेकिन आईपीएल में इनसे ज़्यादा कीमत वाले भारतीय खिलाड़ी युवराज, धोनी, यूसुफ़ पठान, दिनेश कार्तिक और गौतम गंभीर ऐन वक्त पर फ्लॉप साबित हुए.

आलोचक भारतीय कप्तान के इस तर्क को भी काट रहे है कि टीम क्षमता के मुताबिक बल्लेबाज़ी नहीं कर पाई. आलोचकों का कहना है कि भारतीय कप्तान कौन सी क्षमता की बात कर रही है. सिर्फ अपनी पिचों पर चौके छक्के लगाने वाले बल्लेबाज़ विश्वविजेता नहीं जाते. बहरहाल पिछले वर्ल्ड कप में टीम के ख़राब प्रदर्शन के बाद बीसीसीआई ने एक समिति बनाई थी, उससे टीम को कितना फ़ायदा हुआ, यह अब सबके सामने है. सबसे धनी क्रिकेटरों से सजी, दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड की टीम विश्व कप में अंतिम चार टीमों में भी जगह नहीं बना पाई.

रिपोर्ट: एजेंसियां/ओ सिंह

संपादन: आभा मोंढे

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