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ब्लॉग

शोक में है मेरा शहर

जर्मनविंग्स के दुर्घटनाग्रस्त विमान में जर्मनी के हाल्टर्न शहर के हायर सेकंडरी स्कूल के स्पेनिश भाषा के 16 छात्रों और दो शिक्षकों का एक दल भी था. डॉयचे वेले के डानिएल पेल्स ने उसी स्कूल से अपनी पढ़ाई की है.

कुछ दिन पहले मैंने योजेफ कोएनिष जिमनैजियम का वेबसाइट देखा था. मैंने शिक्षकों की तस्वीरें देखीं क्योंकि मैं देखना चाहता था कि मेरे पुराने स्कूल में अब कौन पढ़ा रहा है. मैंने 1996 में स्कूल पास किया. वेबसाइट पर बहुत से युवा, उम्मीद भरे चेहरे मेरी ओर देखकर मुस्कुरा रहे थे. उनमें से ज्यादातर को मैं नहीं जानता. और अब उनमें से दो नहीं रहे. टेलिविजन में दिखाई जा रही भूरी इमारत को भी मैं जानता हूं. इनके कमरों में मैं गणित के सवालों में उलझा रहा हूं, स्पोर्ट्स की क्लास में बॉल पकड़ने की विफल कोशिश की है और थिएटर के मंच पर भगवान के किरदार में जान गंवाई है. अब वहां शोक में फूल रखे हैं और मोमबत्तियां जल रही हैं.

जिज्ञासा नहीं सदमा

हाल्टर्न के लोग शोक मना रहे हैं. मेरी मां ने मुझे टेलीफोन पर बताया कि दुर्घटना की खबर सुनने के बाद सबसे पहले उन्होंने सोचना शुरू किया कि उनके परिचितों में किनके बच्चे जिम्नैजियम में पढ़ते हैं. यह सोचना कि कौन से परिवार प्रभावित हो सकते हैं. हाल्टर्न में 37,000 लोग रहते हैं. लोग एक दूसरे को जानते हैं, सब एक दूसरे से प्यार नहीं करते. लेकिन इस घड़ी मे सभी दुर्घटना में शिकार हुए बच्चों और उनके परिवार के बारे में सोच रहे हैं. चिंता और संवेदना के साथ. लोग एक दूसरे से बात कर रहे थे, टेलिफोन कर रहे थे. हर कोई जानना चाहता था कि कौन उस विमान में सवार था. जिज्ञासा के कारण नहीं सदमे के कारण.

Daniel Pelz

डानिएल पेल्स

ये बातचीत आने वाले दिनों में भी नहीं रुकेगी. बहुत से लोग लोकल अखबार देखेंगे, उसमें मौत की खबर ढूढेंगे. हर कोई परिवार वालों को संवेदना जताएगा. पिछले 15 साल से मैं हाल्टर्न में नहीं रह रहा हूं. साल में एकाध बार ही माता पिता से मिलने जाता हूं. स्कूल पास करने पर मुझे खुशी हुई थी. लेकिन इस दुर्घटना के बाद फिर मेरा स्कूल, मेरा शहर याद आ गया..

परिजनों का ख्याल

मैं ही नहीं, मेरे शहर के लोग सदमे में हैं. हमारे मेयर लाइव कैमरे के सामने अपने को संभालने की कोशिश कर रहे हैं. हम उन्हें हंसते मुस्कुराते नगर प्रमुख के रूप में जानते हैं. अब उनकी आंखों से आंसू छलक पड़ना चाहते हैं और वे वही बोल रहे हैं जो सारा हाल्टर्न सोचता है. राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के खिलाड़ी क्रिस्टॉफ मेत्सेल्डर ने ट्विटर पर संवेदना व्यक्त की है. वे भी इसी स्कूल में पढ़े हैं.

हाल्टर्न अपने को संभाल लेगा. मेरी एक अच्छी दोस्त ने शोक में लोगों को सहारा देने का प्रशिक्षण लिया है. वे प्रभावित परिवार वालों को सहारा देंगी, उनकी मदद करेंगी. लेकिन वह अकेली नहीं है. हाल्टर्न की एक छोटी सी प्यारी सी दुनिया है. यहां बहुत से लोग एक दूसरे के साथ हैं, स्वयंसेवी फायर ब्रिगेड में, खेल संगठनों में और चर्च में. उम्मीद है कि परिजन अपने को अकेला महसूस नहीं करेंगे.