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दुनिया

शेखों से अधिकार मांगती महिलाएं

सऊदी अरब में एक सामाजिक संगठन ने राजधानी रियाद में एक बार फिर महिलाओं से 28 दिसंबर को सड़कों पर गाड़ी लेकर उतरने की अपील की है. सऊदी कानून में महिलाओं का गाड़ी चलाना गैर कानूनी है.

सामाजिक कार्यकर्ता नसीमा अल-सदा कहती हैं कि इस तरह के प्रदर्शनों से ये संदेश जाएगा कि गाड़ी चलाने के अधिकार की बात भुलाई नहीं गई है. अभी पिछले हफ्ते ही रियाद में दो महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं को कार चलाने पर पुलिस ने रोक लिया था. लेकिन उस घटना के बाद इन्हीं महिलाओं ने सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और बताया कि प्रशासन में इस मामले पर चर्चा चल रही है. जल्दी ही इसके अच्छे नतीजे आने की उम्मीद भी की जा रही है. नसीमा कहती हैं, "हम तब तक प्रदर्शन जारी रखेंगे जब तक हमें हमारा अधिकार नहीं मिल जाता."

गाड़ी चलाने पर रोक के अलावा, सऊदी महिलाओं को सिर से पैर तक पूरी तरह ढके रहने का निर्देश है. इसके अलावा शादीशुदा महिलाओं के अकेले यात्रा करने या नौकरी करने के लिए भी पुरूषों से आज्ञा लेनी पड़ती है. उनकी शादी भी पुरुषों की मर्जी से तय होती है.

आजादी और परंपरा साथ साथ

इसी साल अक्तूबर में 60 से भी ज्यादा सऊदी महिलाओं ने देश के दकियानूसी कानूनों का विरोध करने के लिए कारें चलाई थीं. तमाम सरकारी चेतावनियों और अपने संगठन की वेबसाइट के हैक हो जाने के बावजूद महिलाएं सड़कों पर निकल पड़ी थीं. सऊदी औरतों ने जता दिया कि पांच साल जेल की सजा का डर भी उन्हें आजादी और समाजिक बराबरी हासिल करने से नहीं रोक सकता.

यूट्यूब इस तरह के विरोध प्रदर्शनों के वीडियो से अटा पड़ा है. कुछ वीडियो में महिला ड्राइवर खुल कर सामने आईं तो कुछ में उन्होंने अपनी पहचान छुपाई. उन्होंने कार चलाते समय बुर्का पहन रखा था. इस दौरान वो कुरान की आयतें या फिर देशभक्ति के गाने सुन रहीं थी. शायद उनका मकसद ये जताना था कि सऊदी महिलाएं परंपराओं और धार्मिक रिवाजों का सम्मान करते हुए अपनी आजादी मांग रही हैं.

अंतरराष्ट्रीय दबाव की जरूरत

अक्टूबर के गाड़ी चलाकर प्रदर्शन करने के दौरान पुलिस ने 16 महिलाओं को सड़क पर ही रोक दिया, उन पर जुर्माना लगाया गया. अभिभावक के तौर पर उनके पतियों को पुलिस ने नोटिस भी जारी किया.

पूरी दुनिया में सिर्फ यही एक देश है जहां औरतों को गाड़ियां चलाने की मनाही है. इसे लेकर सऊदी अरब के कट्टरपंथी समाज की आलोचना भी होती है.

रियाद में रहने वाली रीमा मानती हैं कि दूसरे देश सऊदी अरब पर महिलाओं को बराबरी के अधिकार दिए जाने को लेकर कुछ दबाव बना सकते हैं. मीडिया भी इसमें अहम भूमिका निभा सकता है, "अन्तरराष्ट्रीय मीडिया से बहुत मदद मिल सकती है अगर वे दिखा सकें कि सऊदी अरब में इतनी धन दौलत के बावजूद महिलाओं की जिन्दगी कैसी है. एक इंसान की तरह जीने के लिए आजादी की जरूरत होती है, महंगी चीजों की नहीं."

रिपोर्टः ए लेवी, जे साद/ऋतिका राय

संपादनः ओंकार सिंह जनौटी

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