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ब्लॉग

शुरू हुआ मानव तस्करों के शिकार का सीजन

यूरोपीय संघ ने भूमध्य सागर में मानव तस्करों के खिलाफ सैनिक कार्रवाई का फैसला किया है. डॉयचे वेले के बैर्न्ड रीगर्ट का कहना है कि तोपों से नौकाओं पर गोलीबारी निरर्थक है. उससे यूरोप में शरणार्थी संकट का हल नहीं होगा.

लीबिया में मानव तस्करों के खिलाफ सैनिक कार्रवाई करने की तैयारी के फैसले के साथ यूरोपीय संघ अंतरराष्ट्रीय कानून के नए इलाके में प्रवेश कर रहा है. पहले कभी यूरोपीय देशों ने ऐसा खतरनाक सैनिक अभियान नहीं छेड़ा है और वह भी मुश्किल से पकड़े जा सकने वाले और समझे जा सकने वाले दुश्मन के खिलाफ. वह नियमित पक्ष नहीं है, न ही सेना है बल्कि एक आपराधिक गिरोह है जिसका संभवतः लीबिया के हथियारबंद मिलिशिया और यूरोप के माफिया के साथ निकट संबंध है. जब यूरोपीय संघ मानव तस्करों के नावों और उपकरणों को नष्ट करना शुरू करेगा तो संभव है कि वे विरोध करें और जवाबी गोलीबारी करें. या वे शरणार्थियों को बंधक बना लें और उनका मानव कवच के रूप में दुरुपयोग करें. फिर क्या होगा?

ईयू के सैनिक नेतृत्व को कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश देने होंगे ताकि समुद्र में या लीबिया के तट पर नाकामयाबी न हो. विदेश मंत्रियों और रक्षा मंत्रियों द्वारा तय अभियान को सही तरीके से पूरा करने के लिए बहुत काम की जरूरत है. जर्मन विकास मंत्री गैर्ड मुलर ने एकदम सही कहा है कि सैनिक कार्रवाई किसी समस्या का हल नहीं है. शरणार्थी यूरोप पहुंचने की कोशिश जारी रखेंगे. वे दूसरे रास्ते खोजेंगे और जब तक आप्रवासन की वैध संभावना नहीं होगी वे आपराधिक गिरोहों की सहायता लेते रहेंगे.

सिर्फ आपात कार्रवाई

मानव तस्करों के बिजनेस प्लान को बलप्रयोग के जरिये लीबिया में कुछ समय के लिए दबाया जा सकता है, मगर उसे पूरी तरह नष्ट करना तभी संभव होगा जब शरणार्थी वैध तरीके से यूरोप आ सकेंगे और इस तरह उसकी मांग समाप्त हो जाएगी. यूरोप में कानूनी प्रवेश के नियम तभी संभव होंगे जब यूरोपीय संघ बेहतर साझा शरणार्थी नीति और शरणार्थियों तथा आप्रवासियों के बेहतर बंटवारे पर सहमत होगा. लेकिन ऐसा लगता है कि यह सैनिकों और लड़ाकू विमानों के भेजने से ज्यादा मुश्किल है. बहुत से सदस्य देश इस पर बात करने को भी तैयार नहीं हैं.

उतना ही अस्पष्ट है कि अफ्रीका और मध्यपूर्व के देशों में लोगों के पलायन के कारणों से यूरोपीय संघ कैसे निबटेगा. इन देशों की भी अपने नागरिकों के लिए उतनी ही जिम्मेदारी है जितनी यूरोपीय देशों की है. इस समय यूरोपीय संघ शरणार्थी संकट के नतीजों को ठीक करने में लगा है. समुद्र पर फंसे लोगों की जान बचाना जरूरी है लेकिन वह स्थायी कदम नहीं हो सकता, सिर्फ इमरजेंसी कार्रवाई हो सकती है. अभी तय हुआ सैनिक अभियान एक बड़ी रणनीति का अंतरिम हिस्सा ही हो सकता है.

खुले सवाल

यूरोपीय सीमा सुरक्षा एजेंसी फ्रंटेक्स रजिस्टर कर रहा है कि शरणार्थी यूरोप में प्रवेश के रास्ते बदल रहे हैं. तुर्की से चलने वाली नौकाओं की संख्या बढ़ रही है. तुर्की और बुल्गारिया की सीमा पर दबाव बढ़ रहा है. यहां तुर्की के जल क्षेत्र में या उसकी सीमा में सैनिक कार्रवाई का आदेश नहीं दिया जा सकता है.

फिर यही आभास रहता है कि यूरोपीय संघ के मंत्री मानव तस्करों पर समुद्र में हमले की अपनी योजना के साथ लोगों के बीच अपनी दृढ़ता का परिचय देना चाहते हैं. लेकिन वे असली सवाल से किनारा कर रहे हैं. और वह है कि लोगों के साथ क्या होगा, शरणार्थियों का क्या होगा, जो अव्यवस्था के शिकार लीबिया में दसियों हजार की संख्या में यूरोप जाने का इंतजार कर रहे हैं.

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