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ताना बाना

शुद्ध चॉकलेट कुछ नहीं होती: यूरोपीय कोर्ट

यूरोपीय न्यायालय ने कहा है कि शुद्ध चॉकलेट जैसी कोई चीज नहीं होती. इस फैसले के साथ ही यूरोपीय संघ और इटली के बीच चॉकलेट के लेबल को लेकर चली आ रही लड़ाई भी खत्म हो गई है.

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यूरोपीय न्यायालय के इस फैसले ने इटली के उस कानून को निरस्त कर दिया है जिसके तहत चॉकलेट की कुछ किस्मों को शुद्ध चॉकलेट माना जाता है. कोर्ट ने कहा कि अगर कोई उत्पाद 100 फीसदी कोकोआ बटर से बना है तो इस बात को रैपर पर लिख देना ही काफी है. फैसले में कहा गया है कि यूरोपीय संघ ने 1999 में चॉकलेट के लेबल को लेकर जो नियम बनाए थे उनमें शुद्ध चॉकलेट जैसी चीज का कोई जिक्र नहीं है.

Flash-Galerie Schokolade

इटली में 2003 में एक कानून बनाकर चॉकलेट की कुछ किस्मों को शुद्ध चॉकलेट माना गया था. उसका मानना था कि सस्ते चॉकलेट स्तरीय नहीं होते हैं. इसलिए कानून बनाकर कुछ चॉकलेटों को अपने को शुद्ध चॉकलेट कहने की अनुमति दे दी गई. अब यूरोपीय कोर्ट ने इस कानून को निरस्त कर दिया है.

ब्रिटेन जैसे यूरोपीय संघ के कुछ मुल्कों में चॉकलेट बनाते वक्त उसमें खाद्य वसा का इस्तेमाल किया जाता है. कोर्ट ने कहा कि ऐसा होने पर लेबल पर लिखा जाना चाहिए कि इसमें कोकोआ बटर और खाद्य वसा मौजूद हैं.

1999 में यूरोपीय संघ ने लेबल को लेकर नियम बनाए थे. ऐसा एक लंबी बहस के बाद हुआ था जिसमें यूरोपीय संघ के मुल्क दो हिस्सों में बंट गए थे. एक तरफ ब्रिटेन जैसे देश थे जो चॉकलेट में खाद्य वसा का इस्तेमाल करते हैं. दूसरी तरफ इटली और बेल्जियम जैसे मुल्क थे जहां चॉकलेट को सिर्फ कोकोआ से बनाया जाता है.

Flash-Galerie Schokolade

यूरोपीय संघ के प्रवक्ता रोजर वाएटे ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के नियम दो अलग अलग तरह की चॉकलेट की संस्कृति का पूरा सम्मान करते हैं. वाएटे ने कहा, "चॉकलेट बनाने की एक संस्कृति है जो कोकोआ बटर को तरजीह देती है और दूसरी संस्कृति है जिसमें खाद्य वसा को भी जगह मिली हुई है. अलग अलग मुल्कों में अलग अलग संस्कृति है."

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः महेश झा

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