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दुनिया

शिया सुन्नी में जंग

पाकिस्तान भले ही इस्लामी गणतंत्र हो लेकिन यह मुसलमानों के दो धड़ों, शिया और सुन्नी के बीच जंग का मैदान बन गया है. इस साल 200 से ज्यादा शियाओं की हत्या हुई है, बदले की कार्रवाई में सुन्नियों को निशाना बनाया जा रहा है.

कराची में औरंगजेब फारुकी पर जानलेवा हमला हुआ तो उनके छह बॉडीगार्ड मारे गए. खुद उनकी जांघ में एक गोली बुरी तरह धंस गई. लेकिन बुरी तरह घायल होने के बाद भी उन्होंने शियाओं को चेताने में कोई कसर नहीं छोड़ी. अस्पताल से उनका वीडियो संदेश जारी हुआ, "दुश्मन इस बात को सुन लें. मेरा काम अब सुन्नियों में जागरूकता पैदा करनी है. मैं सुन्नियों को इतना ताकतवर बना दूंगा कि उन्हें किसी भी शिया से हाथ मिलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. वे अपनी मौत खुद मरेंगे. हमें उन्हें मारने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी."

पिछले साल 25 दिसंबर को जारी इस वीडियो से शियाओं में दहशत लाजिमी है क्योंकि फारुकी एक चर्चित सुन्नी उलेमा हैं. इस साल क्वेटा में 200 शिया मुसलामनों की हत्या के बाद पूरी दुनिया की नजरें उस शहर पर हैं लेकिन उससे दूर पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची में दोनों समुदायों के बीच झगड़े पर कम लोगों की नजर जा रही है. यहां शियाओं के छोटे छोटे झुंड बदले की कार्रवाई करते नजर आ रहे हैं.

मुश्किल होती जंग

आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में अमेरिका पाकिस्तान का साथ दे रहा है और उस पर इस बात का दबाव है कि अफगानिस्तान में आतंकवादियों का साथ दे रहे पाकिस्तानी संगठनों के खिलाफ कदम उठाए. लेकिन इस बीच लश्कर ए जंगवी के उभरने और हाल के दिनों में ताकतवर बनने के बाद आतंकवाद के खिलाफ युद्ध अपनी धार खोता जा रहा है.

लश्कर ए जंगवी (एलईजे) ने क्वेटा बम धमाकों की जिम्मेदारी ली है और पुलिस का मानना है कि पिछले छह महीने में कराची में 80 शियाओं की हत्या की जिम्मेदारी भी इसी संगठन पर बनती है. मारे गए लोगों में डॉक्टर, बैंकर और शिक्षक भी शामिल हैं.

बदले की कार्रवाई

इसके बदले में कई सुन्नी नेताओं की भी हत्या की गई, जो फारुकी की विचारधारा से सहमति रखते हैं. इसे बदले की कार्रवाई समझा जा रहा है. फारुकी के दर्जनों समर्थकों की गोली मार क हत्या कर दी गई है.

कराची पाकिस्तान का एक मुश्किल शहर है, जहां तस्करों और ड्रग माफिया भी सक्रिय है और जहां हत्याएं राजनीतिक से लेकर बिजनेस और समुदाय से संबंधित हो सकती हैं. लेकिन जांचकर्ताओं का कहना है कि धीरे धीरे साबित होता जा रहा है मेहंदी फोर्स नाम का संगठन फारुकी समर्थकों की हत्या के पीछे है.

पाकिस्तान के धर्मनिरपेक्ष लोगों का दावा है कि इस साल के चुनावों के बाद देश ज्यादा सहिष्णु और लिबरल बन कर उभरेगा लेकिन कराची की घटनाओं से साबित हो रहा है कि देश में ध्रुवीकरण बढ़ता जा रहा है. कराची के रेडियो स्टेशन में काम करने वाले सुंदूस रशीद का कहना है, "शिया और सुन्नियों के बीच की दरार बढ़ती जा रही है. अब आपको अपना खेमा चुनना जरूरी हो गया है." रशीद कभी चांदी का हार अपने गले में पहनते थे, जो उनके शिया होने की निशानी थी और जिसे पहन कर वह काफी गौरवांवित महसूस करते थे. लेकिन अब उन्होंने इसे उतार कर किनारे कर दिया है क्योंकि उन्हें डर है कि यही हार कहीं उनके लिए निशाने का सबब न बन जाए.

'मुस्लिम नहीं शिया'

फारुकी दिसंबर के हमले से उबर चुके हैं. अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और कराची के लांधी इलाके में एक दफ्तर में बैठे हैं. रॉयटर्स से बातचीत में उन्होंने शियाओं के बारे में अपनी राय रख दी, "हम कहते हैं कि शिया नास्तिक हैं. हमारे पास यह कहने का सबूत है. मैं चाहता हूं कि सुप्रीम कोर्ट मुझे बुलाए, तो मैं खुद उनके किताबों का हवाला देकर साबित कर सकता हूं कि वे मुस्लिम नहीं हैं."

बातचीत के बीच भी तस्बीह के दाने चुनते फारुकी कराची में देवबंदी संस्था अहले सुन्नुत जमात के मुखिया हैं. कभी इस संगठन का नाम सिपह ए सहाबा हुआ करता था लेकिन पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने जब आतंकवाद पर लगाम कसी थी, तो 2002 में इस पर पाबंदी लगा दी गई थी. फारुकी का कहना है कि वह हिंसा का विरोध करते हैं और कहते हैं कि एलईजे से उनका कोई रिश्ता नहीं, लेकिन सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि उनके समर्थक चरमपंथियों से मिले हैं.

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