शिकायत करें एसएमएस से | दुनिया | DW | 13.05.2013
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दुनिया

शिकायत करें एसएमएस से

बांग्लादेश की फैक्ट्रियों में हुई दुर्घटनाओं के बाद जर्मनी की स्पोर्ट्स कंपनी एडीडास ने तय कर किया है कि वह एशियाई सप्लायर के यहां काम करने वाले कर्मचारियों को शिकायत दर्ज करने का मौका देगा. वह भी एसएमएस से.

एडीडास की एशियाई दुकानों में काम करने वाले लोग काम करने के माहौल के बारे में 160 शब्दों में एसएमएस के जरिए शिकायत दर्ज सकेंगे. अगर उन्हें लगे कि उनके अधिकारों का हनन हो रहा तो उन्हें शिकायत करने की स्वतंत्रता होगी. एडीडास की प्रवक्ता ने डॉयचे वेले को बताया, "हमें पता चला कि करीब करीब सभी के पास मोबाइल है." एडीडास ने इंडोनेशिया में यह मुहिम शुरू की है. 

इस अभियान के तहत किसी सप्लायर के साथ काम करने वाला कर्मचारी सीधे एडीडास को एसएमएस भेज सकता है. यह सबसे पहले तो प्रबंधन को जाएगा और फिर इसे अलग अलग सप्लायरों को भेजा जाएगा. "लेकिन हम उन तक पहुंच सकते हैं और जान सकते हैं कि मुश्किल कहां है."

अगर एडीडास को लगता है कि सीधे हस्तक्षेप की जरूरत है तो वह स्थानीय गैर सरकारी संगठन से कह कर समस्या हल करने को कहेंगे.

कई समस्याएं

यह पहली बार नहीं है कि पश्चिमी देशों की कंपनियां अपने कपड़े एशिया में बनता रही है और इसके लिए उसकी आलोचना भी होती रही है कि इन देशों में कर्मचारियों के हालात सुधारने के लिए वह कम काम कर रही है. 

पिछले सप्ताह गारमेंट फैक्ट्रियों वाली एक बिल्डिंग ढाका में ढह गई. कई लोगों को मलबे से जिंदा बाहर निकाला जा सका, लेकिन मृतकों की संख्या एक हजार के ऊपर पहुंच गई है. माना जा रहा है कि इमारत के ढांचे में गडबड़ी के बारे में पहले से पता था. दुर्घटना के दिन भी कर्मचारी इसीलिए वहां गए थे क्योंकि उन्हें इसके लिए मजबूर किया गया था.

यह बांग्लादेश में हुई गंभीर दुर्घटनाओं में से एक थी. पिछले साल सितंबर में गारमेंट फैक्ट्री में आग लगने के कारण 112 लोग मारे गए थे. उस समय रिपोर्ट में सामने आया कि सभी आपातकालीन दरवाजे बंद थे और कर्मचारियों को भागने का कोई रास्ता नहीं था.

इस घटना के बाद पश्चिमी देशों की कंपनियों पर दबाव बढ़ा कि वह बांग्लादेश में समस्या पर कदम उठाएं और कर्मचारियों की स्थिति के लिए कुछ करें. हमेशा से गैर सरकारी संगठन एडीडास जैसी कंपनियों पर आरोप लगाते रहे हैं कि वे यहां के लोगों के लिए कुछ नहीं कर रहे जबकि सप्लायर फैक्ट्रियों में सुरक्षा स्थिति अच्छी नहीं.

क्रिश्चन चैरिटी रोमेरो के माइके फ्लाउम कहते हैं कि उन्हें एडीडास के एसएमएस अभियान पर संदेह है और एशिया में कामगारों की हालत सामान्य तौर पर खराब ही होती है. एसएमएस सागर में एक बूंद की तरह होगा. एकदम बेकार. फ्लाउम के मुताबिक एडीडास सिर्फ कीमतें कम करना चाहता है. उसे उत्पादन की स्थितियां बेहतर बनाने के लिए काम करना चाहिए और एसएमएस जैसे कार्यक्रमों में ध्यान नहीं बंटाना चाहिए.

एडीडास ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि टेक्स्ट मेसेज अभियान मार्केटिंग का हिस्सा नहीं है. "एसएमएस कार्यक्रम हमारा अतिरिक्त कार्यक्रम है जो हम कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कर रहे हैं. इसलिए हमें नहीं लगता कि ये बेकार होगा."

एडीडास की प्रवक्ता कहती हैं कि संवादहीनता समस्या का कारण है. इसे बदलना जरूरी है. वहीं फ्लाउम की दलील है कि एडीडास संरचनात्मक ढांचे में बदलाव के लिए कुछ नहीं कर रहा. उनका कहना है कि अगर कामगारों को ज्यादा तनख्वाह मिलती है तो एसएमएस जैसे अतिरिक्त अभियानों का कुछ असर होगा. दुनिया भर में जहां लोग स्पोर्ट गियर मेकर के लिए कपड़े सिलते हैं उन्हें उनकी जरूरत का एक अंश ही मिलता है. कंपनी को सुनिश्चित करना होगा कि ये पैसे बढ़ाए जाएं.

वहीं दूसरों का कहना है कि एडीडास सिर्फ एक उदाहरण है. उद्योग जगत में ऐसी कई कंपनियां हैं. डच एनजीओ फेयर वेयर फाउंडेशन की सोफी कोरेस कहती हैं, "यह सभी मल्टीनेशनल कंपनियों पर लागू होगा. एक ओर वो कहते हैं कि वह कामगारों की हालत सुधारना चाहते हैं लेकिन दूसरी ओर वह तेज और सस्ते उत्पादन की बात करते हैं." दोनों तो नहीं हो सकता.

रिपोर्टः क्रिस्टियान इग्नेट्ज/आभा मोंढे

संपादनः मानसी गोपालकृष्णन

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