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दुनिया

शावान की छुट्टी से भी राहत नहीं

डॉक्टरेड की डिग्री छिन जाने के बाद शिक्षा मंत्री अनेटे शावान ने इस्तीफा दे दिया. डॉयचे वेले की समीक्षक बेटिना मार्क्स कहती हैं कि उनके पास और कोई चारा भी नहीं था. जिसकी डिग्री छिन गई हो, वह शिक्षा मंत्री कैसे रह सकती है.

अंत में कुछ भी शावान के काम नहीं आया. न तो चांसलर अंगेला मैर्केल की दोस्ती और न ही सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी के अध्यक्ष की सहानुभूति और न ही कंजरवेटिव शिक्षा व्यवस्था में व्यापक समर्थन. जर्मनी आखिरकार कोई बनाना रिपब्लिक नहीं है, यहां शिक्षा और शोध के मानक सबसे लिए बराबर हैं, युवा शोधकर्ताओं के लिए भी जो 24 साल की छोटी उम्र में व्यापक विषय पर शोध करने की महात्वाकांक्षा दिखाते हैं. एक शिक्षा मंत्री, जो अपनी पुरानी यूनिवर्सिटी के साथ विवाद में फंसी हों, जो प्रोफेसरों के फैसले के खिलाफ अदालत में जाएं और जो शोध करने वाले समुदाय को अपने फायदे के लिए इकट्ठा करे, वह विज्ञान और शोध की आजादी का भरोसेमंद प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती.

और इसलिए शावान की दोस्त अंगेला मैर्केल के पास भी उनका इस्तीफा स्वीकार करने के अलावा और कोई चारा नहीं रहा. अत्यंत भारी मन से, जैसा कि उन्होंने कहा. पार्टी सदस्य के लिए अपने विस्तृत और हार्दिक प्रशस्ति में चांसलर ने जर्मनी के शिक्षा और शोध केंद्र के लिए उनके योगदान की तारीफ की. पूर्व पर्यावरण मंत्री नॉर्बर्ट रोएटगेन के विपरीत. जिन्हें उन्होंने नॉर्थ राइन वेस्टफेलिया प्रांत में हार के बाद फटाफट हटा दिया था और उनकी जगह पर ऐसे व्यक्ति को मंत्री बनाया जो शायद ही बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, उन्होंने दिखाया कि उन्हें व्यक्तिगत आघात लगा है.

कोई आश्चर्य नहीं, क्योंकि शावान का जाना चांसलर के गहरी क्षति है. उनके जाने से वे कैबिनेट में एक सहारा खो रही हैं और एक करीबी भी. शोध प्रबंध में नकल के सिलसिले में शावान का जाना यह भी दिखाता है कि मंत्रियों के चुनाव में मैर्केल का कोई सौभाग्य नहीं है. दोनों रक्षा मंत्री युंग और गुटेनबर्ग को भी जाना पड़ा था क्योंकि उनका झूठ पकड़ा गया था. उनके द्वारा राष्ट्रपति बनाए गए क्रिस्टियान वुल्फ और उनके पूर्वगामी हॉर्स्ट कोएलर ने भी अपने इस्तीफों के साथ देश के सर्वोच्च पद को नुकसान के साथ छोड़ा. और शावान के मामले में उनकी डॉक्टरेट की डिग्री का ही नहीं बड़ा मूल्यांकन नहीं किया गया है, बल्कि उनके राजनीतिक प्रभाव का भी. उन्हें शिक्षा मंत्री के रूप में बहुत सी मानद डॉक्टरेट की डिग्री दी गई और बर्लिन के फ्री यूनिवर्सिटी में मानद प्रोफेसर का पद भी मिला. लेकिन जर्मन विश्वविद्यालयों की खराब हालत, जहां कम वेतन पाने वाले प्रोफेसरों से समय की कमी और दबाव का सामना कर रहे छात्रों को पढ़ाने की उम्मीद की जाती है, कुछ और ही कहानी कहते हैं.

संसदीय चुनावों से आठ महीने पहले मैर्केल और उनकी सरकार कोई खुशनुमा छवि नहीं पेश कर रही हैं. पूरी तरह विभाजित सत्ताधारी मोर्चा, आश्वस्त कर सकने में अक्षम मंत्री और शायद ही कोई सफलता, यह है अंगेला मैर्केल की दूसरी पारी के साढ़े तीन साल का नतीजा. शावान का इस्तीफा भले ही जरूरी रहा हो, लेकिन मैर्केल के लिए कोई निजात नहीं लाया है. वह दिखाता है कि सत्ताधारी गठबंधन किस हाल में है.

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