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मंथन

शार्क से सीख कर स्वीमिंग सूट

विज्ञान बार बार साबित कर चुका है कि प्रकृति से सीखी गई इंजीनियरिंग सबसे अच्छी होती है. जब बेहतरीन तैराकी सूट बनाने की बात हुई, तो वैज्ञानिकों ने समुद्र की शार्क मछलियों से सीखने का फैसला किया.

शार्क बिना किसी प्रतिरोध के पानी में तैरती है. उसे मदद करती है धार की दिशा में जाने वाली रिबलेट जो कि त्वचा में बना एक छोटा सा खांचा होता है. चमड़ी के ऊपर वाले छिलके इस तरह बने होते हैं कि वे पानी में प्रतिरोध को कम करते हैं.

काफी समय से वैज्ञानिक शार्क की त्वचा की इस संरचना को तकनीकी सतह पर लाने की कोशिश करते रहे हैं. शार्क स्विम सूट की मदद से पिछले सालों में दुनिया भर के तैराकों ने नए रिकॉर्ड बनाए. साथ ही ये माइक्रो रिबलेट, रेस वाली नौकाओं को भी तेज बनाते हैं. माइक्रो रिबलेट की एक फिल्म को हवाई जहाज की सतह पर लगा कर भी परखा गया, लेकिन उनका ज्यादा देर तक इस्तेमाल नहीं हो सकता.

जर्मनी के ब्रेमेन शहर में फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट आईफैम के वैज्ञानिकों ने अब एक वार्निश बनाया है जिससे शार्क के चमड़े की नकल हो सकती है. पेंट एक जटिल नुस्खे की मदद से बनाया जाता है. इस पर पराबैंगनी किरणों का असर नहीं होता और यह तापमान में उतार चढ़ाव और दूसरे दबाव को बर्दाश्त कर सकता है.

पेंट इंजीनियर इवोन विल्के कहती हैं, "दूसरे पेंट की तरह इस पेंट को भी अच्छी पकड़ वाला, मुलायम और कड़ा होना चाहिए. चूंकि इसका इस्तेमाल विमानों में भी होगा, इसलिए इसे तापमान बर्दाश्त करने वाला होना चाहिए. 10,000 मीटर की ऊंचाई पर सूरज की रोशनी बहुत तेज होती है. और इसे घर्षण भी सहना होता है ताकि रिबलेट और उसका अगला हिस्सा काफी समय तक चल सके."

पेंट की एकसमान सतह पाने के लिए ब्रेमेन के वैज्ञानिकों ने विशेष तरीका विकसित किया है. शार्क के चमड़े की संरचना पेंट में बना दी जाती है. इसके अलावा पराबैंगनी किरणें पेंट को कड़ा करती हैं ताकि वह गल न जाए. एक चौड़ा इंजेक्टर पेंट को प्लेट पर स्प्रे करता है. निचले बाएं हिस्से में एकदम सटीक रिबलेट बनाए जाते हैं. साथ साथ रंग एक अल्ट्रा वायलेट लैंप के नीचे सूखता जाता है. शार्क की संरचना बनी रहती है.

वैज्ञानिक रिबलेट की गुणवत्ता नियमित रूप से इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप के नीचे जांचते हैं. कुछ माइक्रो मीटर के रिबलेट लहर की दिशा के विपरीत पानी के घुमाव को रोकते हैं. इसका ऊर्जा संबंधी फायदा है. आईफैम के पेंट प्रमुख डॉक्टर फोल्कमार श्टेंसेल कहते हैं, "इस तरह की सतह की एरोडायनेमिक जांच में पता चला है कि सतह पर घर्षण को सात फीसदी तक कम किया जा सकता है. इसका व्यवहार में मतलब यह है कि हवाई और पानी वाले जहाजों में यह परत लगाकर ईंधन की खपत को बचाया जा सकता है."

पवन चक्कियों में रंग की गई शार्क रिबलेट वाली यह परत लगाने से और ज्यादा ऊर्जा बचाई जा सकती है.

जहां हवा या पानी से होने वाले प्रतिरोध की कोई भूमिका होती है, वहां शार्क के चमड़े की नकल करने वाले इस पेंट की मदद से ईंधन की बचत की जा सकती है या बिजली बनाने में कुशलता लाई जा सकती है. इससे कार्बन डायॉक्साइड का उत्सर्जन भी कम होगा.

रिपोर्टः मार्टिन रीबे/एमजी

संपादनः ए जमाल

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