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जर्मन चुनाव

शार्क के हमले से जर्मन महिला की मौत

मिस्र के मशहूर सिनई प्रायद्वीप के समुद्री तट पर तैर रही जर्मन सैलानी पर एक शार्क ने हमला किया. जिसके बाद उस महिला की मौत हो गई. सप्ताह भर में इस तट पर दूसरी बार शार्क का हमला हुआ है.

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मिस्र के पर्यावरण मंत्रालय ने इस तट सहित शर्म अल शेख के बाकी तटों को अगले 72 घंटे के लिए बंद कर दिया है. हमला करने वाली शार्क को ढूंढा जा रहा है.

रविवार को 70 साल की जर्मन महिला पर शार्क ने हमला कर दिया जिसके बाद उसकी मृत्यु हो गई. ये महिला शर्म अल शेख के रेड सी रिसॉर्ट के पास वाले तट पर तैर रही थी. पिछले सप्ताह हुए शार्क के हमले के बाद अधिकारियों ने तट के कुछ हिस्से में तैरने पर रोक लगा दी थी. अभी यह साफ नहीं है कि मृत महिला प्रतिबंधित इलाके में तैर रही थी या कहीं और.

पिछले ही सप्ताह शर्म अल शेख में ही शार्क के हमले के कारण तीन रूसी और एक यूक्रेनी सैलानी घायल हो गए. इसके बाद पर्यावरण मंत्रालय ने बुधवार से शनिवार तक इस तट को बंद रखा.

गुरुवार को अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने दो शार्क मछलियों को पकड़ा है. सिनई में शार्क के हमले असामान्य हैं. यह प्रायद्वीप पर्यटकों की पसंदीदा जगह है.

सिनई के गोताखोरी केंद्र के रोल्फ श्मिड का कहना है कि एक ही सप्ताह में शार्क के चार हमले यहां हैरत की बात है. "यह हमला नाम की खाड़ी के उत्तर में मिडिल गार्डन के उथले इलाके में हुआ. इस इलाके में पिछले 10-15 साल से शार्क मछलियां थी ही नहीं."

पर्यावरण सुरक्षा और संरक्षण संगठन (एचईपीसीए) का कहना है कि पकड़ी गई शार्क और हमला करने वाली शार्क के फोटो अलग अलग मछलियों के हैं. "दूसरा हमला करने वाली समुद्री व्हाइटटिप शार्क और पहले हमला करने वाली शार्क के फोटो की तुलना करने पर समझ में आता है कि हमले अलग अलग मछलियों ने किए हैं."

मिस्र में शार्क के हमले के कारण 2009 में एक फ्रांसिसी महिला मारी गई थी. इसके पहले 2004 में शार्क के हमले के कारण एक व्यक्ति की मौत हुई थी.

चिंता जाहिर की जा रही है कि इन हमलों के कारण पर्यटन उद्योग पर असर हो सकता है. इस इलाके में पर्यटन कई लोगों की आय का स्रोत है और विदेशी मुद्रा का भी.

पर्यटन अधिकारी इस विषय पर बातचीत कर रहे हैं कि किस तरह से रिसॉर्ट की लोकप्रियता को नुकसान नहीं पहुंचे. गोताखोरी और मेरिटाइम गतिविधियों के लिए जिम्मेदार हाशिम गाबर का कहना है, "हम फिलहाल हालात का जायजा ले रहे हैं. हम बैठक में चर्चा करने वाले हैं कि आगे क्या कदम उठाएं."

पर्यावरण के लिए काम कर रहे गैर सरकारी संगठन एचईपीसीए के सलाहकार महमूद हनफी का कहना है कि शार्क के हमले की खबर को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जा रहा है. "पर्यटन उद्योग पर इसका कोई असर नहीं होना चाहिए और इसके प्रभाव को बिलकुल बढ़ा चढ़ा कर पेश नहीं किया जाना चाहिए. एक दो घटनाएं बहुत बड़ी बात नहीं है लेकिन अधिकारी इस पर ठीक से कार्रवाई नहीं कर रहे हैं जिस कारण लोगों में डर पैदा हो रहा है."

रिपोर्टः एजेंसियां/आभा एम

संपादनः एन रंजन