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मनोरंजन

शाकाहार के लिए एक दिन दोःपॉल मैकार्टिनी

दुनिया भर में शाकाहार के लिए आवाज बुलंद करने वाले मशहूर गायक पॉल मैकार्टिनी ने अब भारत में एक दिन को शाकाहारी दिवस बनाने की मांग की है. बीटल्स और विंग्स के पूर्व संगीताकर गायक ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखी.

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पीपल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनीमल्स यानी पेटा के लिए काम करने वाले पॉल मैकार्टिनी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिख कर भारत में शाकाहारी दिवस घोषित करने की मांग की है. वह दिन जब देश में लोगों को कम से कम एक दिन के लिए मांसाहारी भोजन न खाने के लिए प्रेरित किया जा सके.

मैकार्टिनी का मानना है कि शाकाहार दिवस के रूप में मिला एक दिन जानवरों की रक्षा तो करेगा ही, साथ ही पर्यावरण और लोगों की सेहत के लिए भी अच्छा साबित होगा. मैकार्टिनी ने अपने पत्र में लिखा है कि ये एक तरह से जीवन का समारोह होगा. 2003 में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य संगठन ने एक सर्वे किया था जिसके मुताबिक भारत में 42 फीसदी लोग शाकाहारी हैं और इसके पीछे आर्थिक और धार्मिक कारण हैं. हिंदू और जैन धर्म का कड़ाई से पालन करने वाले लोग मांस नहीं खाते.

Paul Mc Cartney in Hamburg

दुनिया भर के सबसे सफल संगीताकारों में पॉल मैकार्टिनी लंबे समय तक सबसे ज्यादा बिकाऊ गायक और संगीतकार बने रहे. गिनीज बुक के रिकॉर्ड के मुताबिक कारोबारी लिहाज से मैकार्टिनी सबसे कामयाब गीतकार हैं. बीटल्स के लिए काम करने के दौरान ही उन्हें नशीली दवाओं की लत लगी और फिर वो इसके शिकंजे में फंसते चले गए. ये शिकंजा इतना ज्यादा तगड़ा हो गया कि मैकार्टिनी को जेल की भी हवा खानी पड़ी और तब उनकी जीवन की दिशा दूसरी ओर मुड़ गई. मशहूर अध्यात्मिक गुरु महर्षि महेश योगी ने उन्हें अध्यात्म का रास्ता दिखाया और फिर मैकार्टिनी के लिए एक नई दुनिया के रास्ते खुल गए. मैकार्टिनी ने भारत में महेश योगी के आश्रम में काफी वक्त बिताया.

हालांकि शाकाहार की तरफ उनका झुकाव तब हुआ जब एक बार भेड़ का मांस खाने के बाद उन्होंने भेड़ों को मैदान में चरते देखा. इसके कुछ ही दिनों बाद एक फिल्म में हिरण को गोली मारते हुए देखना भी उन पर गहरा असर कर गया और इसके बाद उन्होंने शाकाहार को अपना लिया. इतना ही नहीं दुनिया भर में शाकाहार के लिए लोगों को प्रेरित करने की मुहिम से भी जुड़ गए और पेटा को भी उसकी आवाज बुलंद करने वाला एक मजबूत साथी मिल गया. 1999 में पॉल ने अपनी बीवी लिंडा के नाम पर शुरु किए गए शाकाहारी खाने की जीएम तत्वों से मुक्त करने के लिए 3 लाख पाउंड खर्च किए. जिन दवाओं में मांस का प्रयोग होता है उसे बंद करने के लिए भी मैकार्टिनी जबर्दस्त मुहिम चला रहे हैं.

रिपोर्टः एजेंसिया/एन रंजन

संपादनः ए कुमार

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