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जर्मन चुनाव

शांति योजना देंगे कश्मीरी उग्रवादी

भारत प्रशासित कश्मीर में सक्रिय उग्रवादियों ने इच्छा जाहिर की है कि वे केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त वार्ताकारों के दल के सामने एक शांति योजना पेश करना चाहते हैं. वार्ताकारों के अध्यक्ष दिलीप पडगांवकर के मुताबिक यह अहम है.

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पडगांवकर ने हाल ही में इन उग्रवादी संगठनों से मुलाकात की. इन मुलाकातों के बारे में जानकारी देते हुए पडगांवकर ने कहा, "हम पहली बार आतंकवादी संगठनों के लोगों से मिले. उन्होंने कहा कि क्या हम एक बार और मिल सकते हैं, हमें बात करनी है. इसलिए हम दोबारा गए."

एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में पडगांवकर ने कहा, "जब हम दोबारा गए तो डेढ घंटे तक चली बैठक में कई हैरतअंगेज बातें हुईं. उनमें से एक शख्स संगठनों के प्रवक्ता की तरह बात कर रहा था. उसने कहा कि वे हमें एक शांति योजना देना चाहते हैं."

पडगांवकर के मुताबिक आतंकवादी चाहते हैं कि उनकी आवाज सुनी जाए इसलिए उन्होंने कुछ दिन इंतजार करने को कहा है. वरिष्ठ पत्रकार पडगांवकर ने कहा, "उनका मानना है कि उनके पास एक रोडमैप है. हमने कहा कि हम आपको सुनने आए हैं. हम तैयार हैं. जब भी आप अपनी बात तैयार कर लें तो हमें बता दें और फिर हम उस पर विचार करेंगे. मैं इसे महत्वपूर्ण मानता हूं क्योंकि हमसे यही कहा गया था कि लोगों से बात करें."

अन्य वार्ताकार राधा कुमार से जब पूछा गया कि वह आतंकवाद के आरोपियों से भी मिलीं, तो उन्होंने कहा, "वे भी कश्मीर के नजरिये को पेश करते हैं, दुर्भाग्य से वह अच्छा नहीं है. लेकिन उनसे मिलना भी अहम है." उन्होंने बताया कि उनके जेल में लोगों से मिलने जाने का मकसद पत्थरबाजी के आरोप में गिरफ्तार युवकों और राजनीतिक कैदियों से मिलना था. राधा कुमार ने कहा कि उन लोगों का नजरिया अरुचिकर हो सकता है लेकिन हमें उनकी बात सुननी चाहिए.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः उभ

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