शरिया पुलिस को स्वीकार नहीं करेगा जर्मनी | दुनिया | DW | 09.09.2014
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दुनिया

शरिया पुलिस को स्वीकार नहीं करेगा जर्मनी

जर्मन सरकार ने वुपर्टाल में शरिया पुलिस का कड़े शब्दों में विरोध किया है. इस मार्च को आयोजित करने वाले व्यक्ति का कहना है कि उन्होंने यह सिर्फ जागरूकता बढ़ाने के लिए किया.

वुपर्टाल शहर में हुई घटना का चांसलर अंगेला मैर्केल की पार्टी ने विरोध किया है. गृह मंत्री थोमास डे मेजियेर ने चेतावनी दी कि लोग यूनिफॉर्म पर शरिया पुलिस का लोगो लगाए जैकेट पहन कर जर्मनी की सड़कों पर नहीं घूम सकते.

इन लोगों ने डिस्कोथेक और जुआघरों के आस पास मार्च किया और लोगों को जुआ खेलने और शराब पीने से रोकने की कोशिश की. डे मेजियेर ने बिल्ड अखबार में कहा, "जर्मन जमीन पर शरिया कानून सहन नहीं किया जाएगा. कोई भी जर्मन पुलिस का अच्छा नाम खराब नहीं करेगा."

न्याय मंत्री हाइको मास ने जोर देकर कहा है कि जर्मनी में न्याय सिर्फ सरकार की ही जिम्मेदारी है. मास ने कहा कि यह बहुत ही सामान्य बात है कि समानांतर अवैध न्याय प्रणाली को स्वीकार नहीं किया जाएगा.

उद्देश्य अलग

इस मार्च के लिए जिम्मेदार 33 साल के युवक स्वेन लाऊ ने अपनी वेबसाइट पर एक वीडियो जारी किया. लाऊ ने इसमें कहा कि शरिया पुलिस कभी थी ही नहीं. इन आदमियों ने सिर्फ कुछ घंटों के लिए ऐसी यूनिफॉर्म पहनी थी. उन्होंने कहा, "हम जानते थे कि इससे लोगों का ध्यान आकर्षित होगा." लाऊ ने कहा कि वह इस एक्शन के जरिए जर्मनी में शरिया कानून पर बहस शुरू करना चाहते थे.

लाऊ जर्मनी की सलाफी मूवमेंट के सदस्य हैं और राजनीतिक इस्लाम को कट्टर सुन्नी नजरिए से देखते हैं. वह मोएंशनग्लाडबाख की एक मस्जिद के साथ काम करते हैं. यहां वह गुट के प्रमुख हैं जिसका नाम है "इनविटेशन टू पैरेडाइस".

जर्मनी में मुस्लिम केंद्रीय परिषद (जेडएमडी) ने इन गतिविधियों का कड़े शब्दों में विरोध किया. अध्यक्ष एमान ए माजयेक ने कहा, "ये कुछ किशोर हमारे नाम पर नहीं बोल सकते. ये हमारे धर्म का नाम खराब कर रहे हैं. इस मूर्खतापूर्ण कार्रवाई से वह मुसलमानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं."

जर्मनी में सलाफियों और कट्टर सोच वाले सलाफियों के बारे में लंबे समय से बहस चल रही है. ऐसे में इस तरह की कार्रवाई ने जर्मन पुलिस, प्रशासन और सरकार के कान खड़े कर दिए हैं.

एएम/आईबी (एएफपी, रॉयटर्स)

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