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दुनिया

शरणार्थी समझौते पर सहमति

"शरणार्थी संकट यूरोपीय संघ को तोड़ देगा," ऐसी कड़ी चेतावनी का असर यूरोपीय संघ और बाल्कान देशों के शीर्ष नेताओं की आपात बैठक में दिखा. शरणार्थी संकट से निपटने के लिए फौरी कदमों पर सहमति बनी.

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ईयू और बाल्कान देशों के बीच सहमति

ब्रसेल्स में रविवार शाम हुई इमरजेंसी बैठक के बाद यूरोपीय संघ और बाल्कान नेताओं ने शरणार्थी रजिस्ट्रेशन केंद्रों में जगह बढ़ाने का एलान किया. समझौते के मुताबिक एक लाख अतिरिक्त लोगों के रहने की व्यवस्था की जाएगी. बैठक में यूरोपीय संघ के 11 देशों और बाल्कान के तीन देशों सर्बिया, मेसिडोनिया और अल्बानिया ने हिस्सा लिया.

बीते हफ्ते ग्रीस में हर दिन 9,000 शरणार्थी पहुंचे. समझौते के तहत ग्रीस रजिस्ट्रेशन केंद्रों में 20,000 लोगों के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करेगा. बाल्कान देशों में 50,000 लोगों के लिए व्यवस्था की जाएगी. इनमें से ज्यादातर शरणार्थी जर्मनी और स्कैंडिनेविया जाना चाहते हैं. शरणार्थी संकट की गंभीरता का जिक्र करते हुए यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जाँ क्लोद युंकर ने कहा, "सिर्फ यही एक तरीका है जिससे लोगों के अनियंत्रित बहाव से पैदा हुई स्थिति को संभाला जा सकता है."

यूरोपीय संघ के देश अब तक शरणार्थियों को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने दे रहे थे. लेकिन अब इस पर रोक लगाने की तैयारी हो रही है. युंकर ने कहा, "हमने बहुत साफ कर दिया है कि लोगों को आगे बढ़ा देने की नीति बंद होनी चाहिए." यूरोपीय संघ में दाखिल होने वाले विस्थापितों के बारे में सूचना साझा करने पर भी सहमति बनी है.

स्लोवेनिया की चेतावनी

20 लाख की आबादी वाले स्लोवेनिया के लिए शरणार्थी संकट से निपटना मुश्किल होता जा रहा है. सिर्फ रविवार को ही वहां 15,000 शरणार्थी पहुंचे. देश की गृह मंत्री वेस्ना मितरिच के मुताबिक क्रोएशिया से पांच ट्रेनें और आ रही हैं, जिनमें शरणार्थी भरे हुए हैं. मितरिच ने इसे मुश्किल की घड़ी करार दिया, "हम वह कर रहे हैं जो हम कर सकते हैं, लेकिन स्लोवेनिया के पास जगह, मानव संसाधन, उपकरण और ढांचे की अपार क्षमता नहीं है."

स्लोवेनिया के प्रधानमंत्री मिरो सेरार ने रविवार को ब्रसेल्स में बाकी नेताओं को साफ चेतावनी देते हुए कहा कि शरणार्थी संकट के प्रति ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यूरोपीय संघ बिखरने लगेगा. स्लोवेनिया में बीते हफ्ते तक करीब 60,000 शरणार्थी पहुंच चुके हैं.

बोझ साझा करें

ब्रसेल्स की बैठक में जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने शरणार्थियों के लिए लिए राहत, ढंग का आवास व सुविधाओं पर जोर दिया. शरणार्थी संकट को लेकर नाराजगी जता रहे देशों को आगाह करते हुए मैर्केल ने कहा कि बाल्कान रास्ते के देशों ने भी शरणार्थियों को लेकर हुए जेनेवा समझौते पर दस्तखत किया है.

मैर्केल ने एक बार फिर मानवीय मूल्यों की वकालत की, "यूरोप को यह जरूर दिखाना चाहिए कि वे मूल्यों वाला महाद्पीव है, बंधुत्व वाला महाद्वीप है. यह एक निर्माणाधीन ब्लॉक है, लेकिन हमें कई कदम उठाने होंगे."

जर्मनी चाहता है कि शरणार्थी संकट को हल करने में तुर्की की भी मदद ली जाए. बीते हफ्ते इस्तांबुल गई जर्मन चांसलर तुर्की को इस बात के लिए मना चुकी हैं. तुर्की चाहता है कि वह भी यूरोपीय संघ का सदस्य देश बने. इस्तांबुल को लग रहा है कि शरणार्थी संकट के समाधान में भूमिका निभाकर वह यूरोपीय संघ में दाखिल हो सकता है.

ओएसजे/एमजे (एएफपी, डीपीए)

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