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दुनिया

'शरणार्थी नहीं लाए जर्मनी में इस्लामी आतंक'

जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने क्षेत्रीय चुनावों से पहले एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि शरणार्थी जर्मनी में आतंकवाद लेकर नहीं लाए हैं. और साफ किया कि जर्मनी का इस्लाम वो है जो जर्मन संविधान की कद्र करता है.

चांसलर मैर्केल ने अपनी क्रिस्चियन डेमोक्रैट्स पार्टी की ओर से एक पूर्वी जर्मन राज्य मेक्लेनबुर्ग-फोरपोमैर्न में चुनाव अभियान के दौरान शरणार्थियों पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया. इस राज्य में 4 सितंबर को क्षेत्रीय चुनाव कराए जाने हैं. जर्मनी की विपक्षी और दक्षिणपंथी रुझान वाली पार्टियां आने वाले चुनावों में शरणार्थियों और जर्मनी में हाल की आतंकी वारदातों को जोड़कर मैर्केल की शरणार्थी नीति पर निशाना साध रहे हैं.

पिछले साल 10 लाख से भी अधिक लोग मध्यपूर्व, अफ्रीका और बाकी संकटग्रस्त देशों से जान बचाकर जर्मनी पहुंचे थे. चांसलर मैर्केल ने इन लोगों के लिए देश की सीमाएं खोल दी थीं, जिसे लेकर विपक्षी दलों ने तब भी ऐतराज जताया था. लेकिन इस साल हाल ही में एक के बाद एक जर्मनी में नागरिकों पर हुए चार हमलों में से तीन में शरणार्थियों का नाम आने के कारण रिफ्यूजी विरोधी माहौल बना है. इनमें से दो हमलों की जिम्मेदारी कट्टरपंथी गुट इस्लामिक स्टेट ने ली है.

देखिए कैसे अनास मोदामनी नाम के इस सीरियाई शख्स का पूरा जीवन ही चांसलर मैर्केल के साथ ली एक सेल्फी ने बदल कर रख दिया.

चांसलर मैर्केल ने कहा, "आईएस द्वारा अंजाम दी जा रही इस्लामी आतंक की घटनाएं कोई ऐसी बात नहीं है जो शरणार्थियों के साथ हमारे यहां आई है." चांसलर ने आगे बताया कि उससे पहले ही कई लोग जर्मनी से सीरिया जाकर वहां इस्लामी आतंकियों से ट्रेनिंग ली. जून में जर्मन गृह मंत्री थोमास दे मेजियेर ने सीरिया और इराक जाने वाले ऐसे लोगों की संख्या 800 से भी अधिक बताई थी. मैर्केल ने इन लोगों के लिए कहा, "यह समूह हमें कई सालों से चिंता में डाले हुए है."

इस साल जर्मनी की धरती पर आम नागरिकों पर हुए हमलों के कारण चांसलर मैर्केल की लोकप्रियता को ठेस पहुंची है. पिछले हफ्ते प्रकाशित हुए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि करीब 52 फीसदी जर्मन लोग उनकी शरणार्थी नाति को बुरा मानते हैं. चांसलर ने साफ किया कि "वो इस्लाम जो जर्मनी के संविधान के आधार पर काम करता है... वह जर्मनी का इस्लाम है." उन्होंने इस पर भी जोर दिया कि ऐसे इस्लाम की देश में कोई जगह नहीं जो जर्मन संविधान का पालन नहीं करता और महिलाओं को बराबर अधिकार नहीं देता.

यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी में हाल के सालों में पहुंचे प्रवासियों में ज्यादातर मुसलमान हैं. इसे मुद्दा बनाकर जर्मनी की प्रवासी-विरोधी दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी ने अपने लिए काफी समर्थन जुटाया है. आने वाले क्षेत्रीय चुनावों में इस दल के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही है. 4 सितंबर को पूर्वी जर्मन राज्य मेक्लेनबुर्ग-फोरपोमैर्न में और 18 सितंबर को बर्लिन में चुनाव होने हैं. बर्लिन को जर्मनी की राजधानी होने के साथ साथ एक सिटी-स्टेट का भी दर्जा प्राप्त है.

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