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दुनिया

शरणार्थियों पर ठंड और गुस्से की दोहरी मार

जर्मनी में गिरते पारे के बीच शरण की तलाश में यूरोप पहुंचे हजारों लोग टेंट में ठंडी रातें बिताने को मजबूर हैं. सोमवार को ड्रेसडेन में पेगीडा की विदेशी विरोधी रैली निकली तो उनके खिलाफ प्रवासी समर्थक समूह भी सड़कों पर उतरा.

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सीमाओं के बीच फंसे शरणार्थियों का हाल

25 साल का अफगान नागरिक हुसैन कहता है, "उन्होंने कहा है कि वे कुछ करेंगे, लेकिन हमें नहीं बताया कि क्या. शायद हम सब बर्फ जैसे जमने वाले है." हुसैन जर्मन शहर हैम्बर्ग के शरणार्थी शिविर में कई दिनों से रह रहा है. हुसैन कहता है कि रात को टेंट में एक घंटा भी बिताना मुश्किल होता है.

सोमवार रात पूर्वी जर्मन शहर ड्रेसडेन में विदेशी-विरोधी गुट पेगीडा की पहली वर्षगांठ के मौके पर रैली निकाली गई. रैली में रिपोर्टिंग के लिए पहुंचे डीडब्ल्यू के पत्रकार जाफर अब्दुल करीम पर प्रदर्शकारियों ने हमला किया. इसके पहले वे जर्मनी में शरणार्थियों की हालत पर विस्तार से रिपोर्टिंग कर चुके हैं. कुछ ही दिनों पहले उन्होंने एक शरणार्थी कैंप का रात में दौरा किया.

पूरे जर्मनी में ठंड पसर रही है और शून्य डिग्री के आसपास पहुंचते तापमान में बिना किसी तरह की हीटिंग की सुविधा के रात काटना खासा मुश्किल है. केवल हैम्बर्ग में ही करीब 4,000 शरणार्थी टिके हुए हैं. लेकिन यह समस्या केवल इस शहर की नहीं है. जर्मनी में इस साल 8 से 10 लाख शरणार्थियों के पहुंचने का अनुमान है और देश अभूतपूर्व शरणार्थी संकट से जूझ रहा है.

उसके विरोध में भी प्रदर्शकारियों का समूह सड़कों पर उतरा. पेगीडा यानि पेट्रिऑटिक यूरोपीयंस अगेंस्ट इस्लामिजेशन ऑफ दि वेस्ट का कहना है कि उनकी रैली में 15 से 20 हजार लोगों ने हिस्सा लिया. पेगीडा समर्थकों ने पुलिस पर पटाखे भी छोड़े.

करीब इतनी ही संख्या में शहर के कई हिस्सों में पेगीडा विरोधी प्रदर्शकारी इकट्ठे हुए और "हार्ट इन्स्टेड ऑफ हेट" यानि घृणा की जगह प्रेम का नारा दिया. दोनों गुटों के बीच कुछ जगहों पर झड़प की भी खबरें हैं. पिछले साल आंतरिक कलह और घटते समर्थन के कारण कमजोर पड़ चुके पेगीडा ने एक बार फिर शरणार्थी विरोधी नीति के साथ वापसी की है. चांसलर मैर्केल की प्रवक्ता ने कहा है कि वे मानती हैं कि जो लोग भी पेगीडा के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं "उनके दिलों में घृणा भरी है." चांसलर मैर्केल ने लोगों से रैली से दूर रहने को कहा है.

इस बीच हंगरी के अपनी सीमाओं को बंद करने के कारण क्रोएशिया की ओर से जाने वाले हजारों आप्रवासियों ने स्लोवेनिया में प्रवेश की कोशिश की है. मंगलवार को स्लोवेनियाई संसद में सीमा सुरक्षा को लेकर नए कानून पास किए जाने की सूचना है. वे चाहते हैं कि अब सीमा को सुरक्षित करने में पुलिस की मदद के लिए सेना का इस्तेमाल हो. केवल 20 लाख की आबादी वाले छोटे से यूरोपीय देश स्लोवेनिया की सीमाएं क्रोएशिया, हंगरी, ऑस्ट्रिया और इटली से लगती हैं.

सोमवार को संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने कहा कि क्रोएशिया की सीमा से लगे सर्बिया में फिलहाल 10,000 से अधिक प्रवासी पहुंच चुके हैं. जबकि कई अन्य वहां पहुंचने के रास्ते में हैं.

ऋतिका राय (एएफपी, डीपीए, रॉयटर्स)

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