1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

'शनि' से 'शिव' तक हक मांगती महिलाएं

हिन्दुओं के धार्मिक त्योहार महाशिवरात्रि के मौके पर भूमाता ब्रिगेड संगठन की महिलाएं मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश करना चाहती हैं. भारत में पूजास्थल पर लैंगिक भेदभाव को खत्म करने की मांग को आखिर कितना समर्थन हासिल है.

महाराष्ट्र में शनि शिंगणापुर के बाद अब नासिक के त्र्यंबकेश्वर मंदिर में महिलाओं को पूजा करने का अधिकार मिलने का संघर्ष चल रहा है. महाराष्ट्र के भूमाता रणरागिनी ब्रिगेड ने महाराष्ट्र के प्राचीन शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं को पूजा का हक दिलाने के लिए संघर्ष छेड़ा था. वहां इन्हें अभी तक जीत नहीं मिली है. इस बीच महाशिवरात्रि के अवसर पर इसी महिला ब्रिगेड ने नासिक के शिव मंदिर त्र्यंबकेश्वर में प्रवेश करने की कोशिशें शुरु कर दी हैं. भूमाता ब्रिगेड की अध्यक्ष तृप्ति देसाई के नेतृत्व में त्र्यंबकेश्वर मंदिर के गर्भगृह में घुसने की तैयारी हुई है.

मंदिर प्रशासन सदियों पुरानी परंपरा का हवाला देकर उन्हें रोकना चाहता है. ऐसे में दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है. महिलाएं पुणे में इकट्ठा हुईं और फिर उन्होंने नासिक के लिए कूच किया. टकराव की स्थिति को भांपते हुए मंदिर के आसपास पहले से ही पुलिस तैनात है. महिलाओं की संख्या 200 के करीब बताई जा रही है.

इस महिला ब्रिगेड की कार्यकर्ता मंदिर प्रशासन की उस “प्राचीन परंपरा” को तोड़ना चाहती हैं जो मंदिर के गर्भ गृह में केवल पुरुषों को ही प्रवेश का अधिकार देता है. भारत भर में हिंदू धर्म के मानने वाले महाशिवरात्रि का पर्व मना रहे हैं. देश भर में त्र्यंबकेश्वर मंदिर को शिव का सबसे महत्वपूर्ण पवित्र स्थल माना जाता है. यह भारत में शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक का स्थान माना जाता है.

भारत के धार्मिक महत्व के कई केंद्रों और तमाम मंदिरों में आज भी लिंग के आधार पर भेदभाव जारी है. पत्रकारों से बातचीत में देसाई ने बताया, "हाई एलर्ट जारी होने के कारण नासिक पुलिस ने हमसे बसों में आने से मना किया इसलिए हम छोटे वाहनों से वहां जाएंगे...हम शांतिपूर्ण तरीके से मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करना चाहते हैं." देसाई ने यह भी उम्मीद जताई है कि खुद पुलिस उन्हें पूरी "व्यवस्था" के साथ गर्भ गृह तक ले जाएगी. वहीं नासिक पुलिस महिलाओं को रोकने के लिए तैनात की गई है. भूमाता रणरागिनी ब्रिगेड की महिलाओं को रोकने के लिए महिला दक्षता समिति, शारदा महिला मंडल, पुरोहित संघ और कई अन्य संगठन साथ आए हैं. वे भी मंदिर की पुरानी परंपरा को बचाए रखने के पक्ष में हैं.

महिलाओं को मंदिर के गर्भ गृह में ना जाने देने के पीछे वहां कुछ ऐसी विकिरण की बात कही जाती है जो महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारण होती हैं. वहीं देसाई की ब्रिगेड जैसे कुछ महिला संगठन पूजा की किसी भी जगह पर लिंग के आधार पर भेदभाव ना किए जाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. शनि मंदिर मार्च में उनका साथ करीब 400 महिलाओं ने दिया था.

DW.COM

संबंधित सामग्री