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मनोरंजन

व्हाट्सऐप से मुफ्त फोन

19 अरब डॉलर में बिकी मोबाइल मैसेजिंग सर्विस व्हाट्सऐप इसी साल मुफ्त वॉयस कॉल शुरू कर देगी. बार्सिलोना वर्ल्ड मोबाइल कांग्रेस के उद्धाटन के दिन व्हाट्सऐप के इस एलान से मोबाइल कंपनियों के होश उड़ गए हैं.

मोबाइल और कंप्यूटर तकनीक के लिए मशहूर बार्सिलोना की मोबाइल कांग्रेस के उद्धाटन में व्हाट्सऐप के संस्थापक यान कूम भी पहुंचे. हाल ही में फेसबुक के साथ 19 अरब डॉलर का सौदा करने के बाद अमेरिका से बाहर आए कूम पर हर किसी की नजर थी. इस मौके का फायदा उठाते हुए कूम ने एक बड़ा एलान कर दिया, "हम इस साल की दूसरी छमाही में व्हाट्सऐप पर वॉयस शुरू कर देंगे."

कूम के साथ फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग भी मौजूद थे. कूम ने मेले में आए युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा, "पांच साल पहले हमारे पास कोई यूजर नहीं था, कोई प्रोडक्ट नहीं था. आज हमारे पास 46.5 करोड़ एक्टिव यूजर्स हैं." कूम के मुताबिक प्रोडक्ट अच्छा हो तो विज्ञापन की जरूरत भी नहीं पड़ती. उन्होंने कहा व्हाट्सऐप की आज भी कोई मार्केटिंग नहीं है, सारा काम लोगों के आपसी अनुभव साझा करने से हो रहा है.

पिछले हफ्ते फेसबुक के साथ हुए समझौते के बाद से दुनिया हैरान है कि व्हाट्सऐप में क्या कोई बदलाव होगा. कूम के मुताबिक व्हाट्सऐप में वॉयस कॉल के अलावा कोई बदलाव नहीं होगा. कूम ने कहा, "मार्क जानते हैं कि व्हाट्सऐप की सफलता के लिए जरूरी है कि वो स्वतंत्र रहे."

इंटरनेट वॉयस कॉलिंग के बाजार में टेंगो, वाइबर और स्काईप जैसी कंपनियां पहले ही मौजूद हैं. अब 46.5 करोड़ ग्राहकों के साथ व्हाट्सऐप के इस बाजार में उतरने से प्रतिस्पर्द्धा कड़ी हो जाएगी और नए स्तर पर पहुंचेगी. हालांकि इस होड़ में नुकसान परंपरागत कॉलिंग सुविधा देने वाली मोबाइल कंपनियों का होगा. मोबाइल कंपनियां पहले ही अरबों डॉलर का मैसेज बाजार व्हाट्सऐप और वाइबर के हाथों गंवा चुकी हैं. मैसेजिंग ऐप्स की वजह से वोडाफोन, अमेरिका मोबाइल और वेरीजोन कम्युनिकेशन जैसी मोबाइल कंपनियों के एसएमएस बाजार को 33 अरब डॉलर का नुकसान हुआ. अनुमान है कि 2016 तक यह नुकसान 56 अरब डॉलर सालाना होगा.

ऐसे में वॉयस कॉल बाजार में व्हाट्सऐप के उतरने से मोबाइल कंपनियों और ज्यादा नुकसान होगा. अच्छी इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले देशों में स्मार्टफोन यूजर्स मोबाइल सर्विस से कॉल करने के बजाए अपने स्मार्टफोन से इंटरनेट डाटा के जरिए मुफ्त बातचीत कर सकेंगे. मोबाइल कंपनियों के सामने नुकसान कम करने का एक ही रास्ता है और वो है इंटरनेट शुल्क. जो कंपनी जितनी अच्छी इंटरनेट कनेक्टिविटी सही दामों में मुहैया कराएगी, वो बाजार में टिक पाएगी.

ओएसजे/एमजे (एएफपी)

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