वे नंगे पैर फुटबॉल खेलते हैं | खेल | DW | 06.08.2013
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खेल

वे नंगे पैर फुटबॉल खेलते हैं

वियतनाम के अंदरुनी इलाके में एक अकादमी है जो स्थानीय बच्चों को बिना जूते या गोलकीपर के फुटबॉल खेलना सिखा रही है. विवादों और खराब प्रदर्शन से जूझ रही राष्ट्रीय टीम के लिए उम्मीद की एक किरण.

चुने हुए 10-11 साल के खिलाड़ी हर दिन एक आधुनिक सुविधा वाले स्कूल में पांच घंटे प्रैक्टिस करते हैं. इस अकादमी को इंग्लैंड की आर्सेनल टीम का सहयोग मिल रहा है. ये खिलाड़ी जेएमजी स्पोर्ट अकादमी की फिलॉसफी पर चलते हैं. जेएमजी अकादमी फ्रांस के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जां मार्क गियु ने स्थापित की थी. टीम के कोच गियोम ग्रेइशेन बताते हैं, "वे नंगे पैर शुरू करते हैं, बिना जूतों और गोलकीपर के." उन्हें इस बात से मजा आता है कि दूसरी टीमें उनके तरीके से चौंक जाती हैं. खिलाड़ियों को जूते पहनने की अनुमति तब मिलती है जब वह बॉल के साथ बाजीगरी में मास्टर हो जाते हैं. ये करने में कम से कम पांच महीने लगते हैं. ट्रेनिंग करीब सात साल दी जाती है.

वियतनाम के प्लेइकू शहर में एचएजीएल आर्सेनल जेएमजी अकादमी में 2007 और 2008 की दो बैच के लिए प्रशिक्षण का ये तरीका तो काम कर रहा है. 27 बच्चों को प्रशिक्षण देने वाले ग्रेइशेन बताते हैं, "सिर्फ वियतनाम में ही नहीं यूरोप या और अन्य देशों में भी वह व्यावसायिक खिलाड़ियों के स्तर के हैं. तकनीकी, कुशलता के हिसाब से और बुद्धि के अनुसार भी वे व्यावसायिक खिलाड़ी बनने के लिए एकदम तैयार हैं." उनका यह भी कहना है कि यूरोप में पिछले साल प्रतियोगिता में खेलने से उनका विश्वास और बढ़ा है.

रिसॉर्ट जैसी अकादमी जहां बढ़िया हरे पिच हैं, स्विमिंग पूल है और बच्चों को रहने के लिए शानदार विला हैं. ये सब सुविधाएं वियतनाम के समूह होआंग आन्ह गिया लाई (एचएजीएल) ने दी है. इसी समूह की वियतनाम लीग में एचएजीएल टीम भी है.

इसकी आर्सेनल के साथ साझीदारी है, जो हर साल बच्चों के विकास पर नजर रखने के लिए एक मैनेजर भेजते हैं.

आर्सेनल से आए विजिटिंग कोच आर्सेने वेनगर के मुताबिक, "अकादमी अभी तक अच्छे से काम कर रही है और कई युवा खिलाड़ी उभर रहे हैं." आर्सेनल इंग्लिश प्रीमियर लीग की पहली ऐसी टीम बन गई है जिसने वियतनाम में खेला. स्थानीय लोगों ने इस मैच के लिए रात भर खड़े हो कर टिकट खरीदे. हनोई का 40 हजार सीटों वाला मी दिन्ह स्टेडियम खचाखच भरा था. वियतनाम की टीम 7-1 से हार गई. वियतनाम की राष्ट्रीय टीम भी इसकी लीग की ही तरह उपेक्षित है और वियतनाम के लोग अक्सर यूरोपीय मैचों को ही देखना और उस पर बाजी लगाना पसंद करते हैं.

हीरो से बने विलेन

साल 2000 से वियतनाम का फुटबॉल व्यावसायिक हुआ है. इससे पहले अधिकतर फुटबॉलर अधिकारिक रूप से सरकारी कर्मचारी थे. हो ची मिन्ह के एक फैन बताते हैं कि 1980 के आखिरी दशक तक खिलाड़ी बहुत समर्पण के साथ फुटबॉल खेलते थे. राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ी वियतनाम के हीरो माने जाते थे.

Nguyen Duc Kien

वियतनाम फुटबॉल भ्रष्टाचार से ग्रस्त

वियतनाम लीग में भ्रष्टाचार और मैच फिक्सिंग के मामलों के बाद मामला पलट गया. कई खिलाड़ियों, रेफरी और अधिकारियों को जेल जाना पड़ा या फिर मैच फिक्सिंग में शामिल होने के कारण उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया. 55 साल के एक फैन तुओंग कहते हैं, "मैंने 10 साल पहले ही वियतनाम का फुटबॉल देखना बंद कर दिया था. राष्ट्रीय टीम के मैच पर भी मैं ध्यान नहीं देता. लगातार विवादों के कारण मेरा प्यार खत्म हो गया." हिंसा के कारण वी-लीग से धीरे धीरे फैन्स भी दूर हो गए. क्लबों के पैसे बर्बाद हो रहे हैं और इसलिए निवेशक भी धीरे धीरे इससे हाथ खींच रहे हैं. दक्षिणपूर्वी एशियाई खेलों में वियतनाम 145 वीं फीफा रैंकिंग पर पहुंच गई है.

हालांकि खेल के लिए प्यार तो वियतनाम में अभी है. नौ करोड़ लोगों के इस देश में फुटबॉल सबसे पसंदीदा खेल है. हनोई की सड़कों के किनारे अक्सर कुछ बच्चे सस्ती प्लास्टिक बॉल से फुटबॉल खेलते दिख जाते हैं लेकिन स्कूल-कॉलेजों में खेल की कोई सुविधाएं नहीं हैं.

उम्मीद की जा रही है कि एचएजीएल अकादमी स्थानीय फुटबॉल को विकसित करने में मदद करेगी. ग्रेइशेन के मुताबिक, "अगर उन्हें हम सात साल ट्रेन करते हैं, कि वे साथ खेलें, साथ सोचें तो यह वियतनाम के फुटबॉल को प्रभावित तो करेगा. अगर एक से एक बढ़िया खिलाड़ियों एक साथ विकसित हों तो उन्हें एक दूसरे को समझने के लिए बात करने की जरूरत नहीं सिर्फ एक नजर से ही वे सामने वाले को जान लेंगे."

एएम/एनआर (एएफपी)

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