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ताना बाना

वेस्टरवेले अफगानिस्तान में राष्ट्रीय सहमेल के पक्ष में

अफगानिस्तान दौरे पर गए जर्मन विदेश मंत्री गीडो वेस्टरवेले ने वहां राष्ट्रीय सहमेल की वकालत की है. जर्मन संसद में बुधवार को अफगानिस्तान में सैनिकों की तैनाती बढ़ाने के मुद्दे पर मतदान से पहले वे अघोषित दौरे पर पहुंचे.

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वेस्टरवेले ने कहा, "हम राजनीतिक समाधान का समर्थन कर रहे हैं क्योंकि हमें पता है कि अकेले सैनिक समाधान कारगर नहीं होगा." उनके दौरे पर हिंदुकुश पर जर्मन सैनिकों की तैनाती बढ़ाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई. इस समय वहां जर्मन सेना के 4600 जवान तैनात हैं.

विदेश मंत्री वेस्टरवेले सैनिक ट्रांसपोर्टर से राजधानी काबुल पहुंचे. सुरक्षा कारणों से उनके दौरे के बारे में तब तक कोई सूचना नहीं दी गई जब तक कि उनका विमान काबुल में उतर नहीं गया. इसके पहले वे पाकिस्तान के दौरे पर थे जहां उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में शांति स्थापना में पाकिस्तान की केंद्रीय भूमिका है.

Afghanistan Armee NO FLASH

वेस्टरवेले ने अफगानिस्तान में विभिन्न राजनीतिक ताकतों के बीच संवाद की वकालत करते हुए कहा कि लक्ष्य विद्रोहियों को फिर से मुख्य दारा में शामिल करना और सहमेल होना चाहिए.

उन्होंने यह नहीं बताया कि इस्लामी कट्टरपंथी तालिबान छापामारों को किस तरह समाज में शामिल किया जाएगा, लेकिन जर्मनी लंबे समय से भूतपूर्व छापामारों को फिर से समाज में शामिल किए जाने का समर्थन कर रहा है.

अफगानिस्तान में जर्मन सैनिकों की तैनाती के नए फैसले के बारे में जर्मन मंत्रिमंडल में बुधवार को चर्चा होगी. उसके बाद संसद में सरकार के प्रस्ताव पर 28 जनवरी को मतदान की योजना है. 2001 में तालिबान के पतन के बाद से अफगानिस्तान में तैनात जर्मन सैनिकों की तैनाती की अवधि बढ़ाए जाने के लिए संसद का समर्थन तय माना जा रहा है. अब तक इस अभियान में 45 जर्मन सैनिक मारे गए हैं.

संसद के नए मतादेश में 2011 के अंत से पहले जर्मन सैनिकों की वापसी शामिल किए जाने की संभावना है. मसौदे में कहा गया है, "जर्मन सरकार को विश्वास है कि सुरक्षा जिम्मेदारी वापस सौंपे जाने के सिलसिले में 2011 के अंत से बुंडेसवेयर की उपस्थिति कम की जा सकेगी."

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: एस गौड़

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