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जर्मन चुनाव

वेदांता प्रोजेक्ट को लाल झंडी

उड़ीसा में पर्यावरण और आदिवासियों के वजूद को ताक पर रखकर चल रही बॉक्साइट खनन संबंधी वेदांता कॉर्पोरेशन की परियोजना पर रोक लगा दी गई है. देर से ही सही सरकार के इस फैसले के बाद आदिवासी समुदायों में खुशी की लहर दौड़ गई है.

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भारत के केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने मंगलवार को इस परियोजना से होने वाले नुकसान की बात को स्वीकारते हुए मंजूरी देने से मना कर दिया. पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने इसे नियमों के उल्लंघन का गंभीर मामला बताते हुए कहा कि प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं दी जा सकती. साथ ही उन्होंने इस मसले पर उड़ीसा की नवीन पटनायक सरकार को राजनीतिक रोटियां सेकने से बाज आने की भी हिदायत दी.

गौरतलब है कि इस मसले पर कल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रमेश से बंद कमरे में हुई मुलाकात के बाद पटनायक ने सारी जानकारी पत्रकारों को दे दी. रमेश ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह राजनीति का विषय नहीं है. राज्य सरकार के सहयोग से चल रही वेदांता परियोजना पर पर्यावरण मंत्रालय की ओर से मंजूरी मिलने में हो रही देरी को लेकर पटनायक ने प्रधानमंत्री सिंह और रमेश से भेंट की थी. इसके बाद केंद्र सरकार का फैसला पटनायक के लिए तगडा़ झटका है.

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ब्रिटेन की बहुराष्ट्रीय कंपनी वेदांता कॉर्पोरेशन ने उड़ीसा की न्यामगिरि पहाड़ियों में स्थित लांजीगढ़ इलाके में बॉक्साइट खनन परियोजना शुरू की है. इसके लिए कंपनी पर स्थानीय आदिवासी समुदायों के वजूद को संकट में डाल कर 26 हेक्टेयर वन भूमि अधिग्रहण का आरोप है. परियोजना से दो आदिवासी समुदायों डोंगिरया कोंध और कुटिया कोंध के उजड़ने का खतरा पैदा हो गया है.

इसके अलावा कंपनी पर बिना अनुमति लिए खनन को सालाना 10 लाख टन से बढा़ कर 60 लाख टन करने और उन 14 खदानों से खनन करने का आरोप है जिनमें 11 से खनन की सरकार ने मंजूरी ही नहीं दी है. इस मामले पर आदिवासी समुदाय काफी समय से सामाजिक संगठनों के साथ मिल कर उड़ीसा से लेकर दिल्ली तक आंदोलन कर रहे हैं.

इन शिकायतों की जांच के बाद भारत की पर्यावरण मंत्रालय की वन परामर्श समिति ने इसे वन अधिकार कानून, पर्यावरण संरक्षण कानून और वन संरक्षण कानून का उल्लंघन बताते हुए वेदांता के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की. रमेश ने इसे स्वीकार कर वेदांता परियोजना को आगे बढा़ने की अनुमित देने मना कर दिया.

रिपोर्टः एजेंसियां/निर्मल

संपादनः ए जमाल

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