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दुनिया

वृद्धि के दौर में बचत का जर्मन बजट

स्कूल के फर्स्ट बॉय की तरह जर्मन सरकार बचत की अपनी योजना पर चल रही है. आर्थिक वृद्धि के मामले में यूरोप की नंबर एक अर्थव्यवस्था वित्तीय संकट से उबर रही है. इस साल घाटा अनुमान से कम होगा.

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वित्त मंत्री शौएब्ले

इस साल सरकारी बजट में 86 अरब यूरो का घाटा होने वाला था. लेकिन वित्त मंत्री वोल्फगांग शॉएब्ले ने संकेत दिया कि यह 50 से 60 अरब के बीच होगा. अगले साल भी लगभग साठ अरब यूरो की सीमा तक घाटे को रखा जाएगा. लेकिन वित्तीय क्षेत्र में तनाव घटने के साथ साथ हर लॉबी की ओर से छूट की मांग की जा रही है. प्रदेशों और स्थानीय निकायों की भी मांग है कि बचत से उन्हें नुकसान हो रहा है, उनकी पीठ पर अर्थजगत की सेहत न बनाई जाए, बल्कि बचत का एक हिस्सा उन्हें दिया जाए. वित्त मंत्री को लगाम कसनी पड़ रही है.

2011 के बजट के मसौदे में 57.5 अरब यूरो नए कर्ज का प्रावधान है. माना जा रहा है कि संसद की वित्त समिति में इस पर विचार के दौरान इसे और घटाया ही जाएगा. संवैधानिक अदालत के फैसले के अनुसार आर्थिक वृद्धि के दौर में अधिक बचाना पड़ेगा, ताकि मंदी के दौर के नुकसान को पाटा जा सके. अदालत का आदेश है कि सामान्य स्थिति रहने पर सन 2016 तक वार्षिक घाटे को दस अरब यूरो तक उतारना है.

संसद में बजट पर बहस का मंगलवार को पहला दिन रहा. विपक्ष की ओर से सरकार पर भारी हमले किए गए. मुख्य विपक्षी दल विपक्षी के बजट विशेषज्ञ कार्स्टेन श्नाइडर ने बजट प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि बचत की योजना खासकर समाज के कमजोर वर्गों के खिलाफ लक्षित है. उन्होंने कहा कि यह बजट सामाजिक विभाजन का गुटका है. वित्तीय संकट के लिए जिम्मेदार सट्टेबाजों पर कोई दबाव नहीं डाला गया है. वामपंथी पार्टी की गेजिने लोएच ने सरकार से मांग की कि उन तबकों पर कर लगाए जाएं, जिनकी वजह से वित्तीय संकट पैदा हुआ था. उन्होंने कहा कि यह एक कलंक है कि बैंकरों को छूआ तक नहीं गया है, जबकि एक बेरोजगार अकेली मां को पहले के मुकाबले 32 फीसदी कम पैसे पर गुजारा करना होगा.

रिपोर्ट: एजेंसियां/उभ

संपादन: ए कुमार

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