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खेल

वुवुज़ेला के सहारे जीतेगा दक्षिण अफ़्रीका

उस्ताद ट्रेनर और 90 हजार वुवुज़ेला से लैस दक्षिण अफ़्रीका की टीम पर इस साल के फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप को यादगार बनाने की चुनौती भी है और महात्वाकंक्षा भी. पीपनी जैसा वाद्य यंत्र वुवुज़ेला जोश बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होता है.

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वुवेज़ेला के साथ दीवाने फुटबॉल प्रशंसक

हर टीम ग्यारह खिलाड़ियों के साथ खेलती है, लेकिन विश्व वरीयता में 83 वें नंबर वाली दक्षिण अफ़्रीका की टीम में बारहवें खिलाड़ी के रूप में वुवुज़ेला होगा. पीपनी जैसे वाद्य यंत्र वुवुज़ेला से लैस फैन्स अपने शोर से स्टेडियम में खिलाड़ियों का जोश बढ़ाने और मस्ती लाने का काम करेंगे. टीम को जितवाने की ज़िम्मेदारी वुवुज़ेला की होगी.

लेकिन अब वुवुज़ेला के शोर से अन्य टीमें दुखी होने लगी है. असंख्य मधुमक्खियों के जैसी लगातार बौराने वाली इस आवाज से टीवी प्रसारकों को भी दिक्कत हो रही है. टीमों, प्रशंसकों और प्रसारकों ने फीफा से मांग कर डाली है कि वुवज़ेला पर प्रतिबंध लगा दिया जाए.

लेकिन मेजबान टीम ऐसा नहीं मानती. मेक्सिको के खिलाफ पहला मैच ड्रा खेलने के बाद भी टीम को उम्मीद है कि वुवुज़ेला की धुन की तरह वह भी लगातार वर्ल्ड कप में बने रहेंगे. दक्षिण अफ़्रीका के कोच कारलोस अल्बैर्टो परेरा ब्राज़ील के हैं और 1994 में विश्व चैंपियन रह चुके हैं. कहते हैं, "हमारा पहला लक्ष्य प्री-क्वार्टर फ़ाइनल में पहुंचना है. उसके बाद आसमान ही सीमा है."

Flash-Galerie WM 2010 Südafrika Stimmung

घर के शोर शराबे से दूर टीम को ट्रेनिंग दिलाने वे जर्मनी के हैर्त्सोगेनाउराख लेकर आए थे, तीन सप्ताह के लिए. टीम की तैयारी और नॉकआउट राउंड में पहुंचने की संभावनाओं के बारे में ट्रेनर परेरा कहते हैं, "मैं बहुत आशान्वित हूं कि हम वहां पहुंचेंगे जो सब हमसे उम्मीद कर रहे हैं."

बफ़ाना बफ़ाना टीम पर बहुत दबाव है. आज तक कोई मेज़बान टीम शुरुआती दौर में टूर्नामेंट से बाहर नहीं हुई है और अफ़्रीकी महाद्वीप पर हो रहे पहले टूर्नामेंट में दक्षिण अफ़्रीका न सिर्फ़ बेहतर प्रदर्शन करना चाहता है बल्कि प्रशंसकों की उम्मीद पर भी खरा उतरना चाहता है. लेकिन वर्ल्ड कप से पहले हुए टेस्ट मैचों में उसका प्रदर्शन बहुत उत्साहजनक नहीं रहा है.

दक्षिण अफ़्रीका यदि प्री-क्वार्टर फ़ाइनल में पहुंचने में सफल रहता है तो यह वर्ल्डकप के इतिहास में उसके लिए पहला मौका होगा और साथ ही टूर्नामेंट के लिए एक अचंभा भी. टीम के वर्तमान प्रदर्शन को देखते हुए कोई इसकी उम्मीद नहीं कर रहा है.

Confed Cup 2009 - Vuvuzela

जर्मन टीम के कप्तान रहे लोथार माथेओस का कहना है कि दक्षिण अफ़्रीकी टीम टूर्नामेंट की सबसे कमज़ोर टीम रहेगी क्योंकि खिलाड़ियों में ज़रूरी क्वालिटी का अभाव है. 1998 और 2002 में दक्षिण अफ़्रीका वर्ल्ड कप खेला था लेकिन नॉकआउट राउंड में पहुंच नहीं पाया जबकि 2006 में जर्मनी में हुए वर्ल्ड कप के लिए वह क्वालिफाई ही नहीं कर पाया था.

दक्षिण अफ़्रीकी टीम के गोलकीपर मोनीब जोसेफ़्स कहते हैं, "हम 90 हज़ार वुवुज़ेला के साथ मेक्सिको के ख़िलाफ़ खेलेंगे. आरंभिक मैचों में यह हमारा सबसे घातक हथियार होगा, देखें हमारे विरोधी इससे किस तरह निबटते हैं." मेक्सिको के साथ उद्घाटन मैच को बाद दक्षिण अफ़्रीका 16 जून को उरूग्वे और 22 जून को फ़्रांस के ख़िलाफ़ खेलेगी. राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा तो वर्ल्ड कप जीतने की ही उम्मीद लगाकर बैठे हैं. कहते हैं, "बफ़ाना बफ़ाना इस समय बेहतरीन तैयारी में लगा है ताकि ट्राफ़ी दक्षिण अफ़्रीका में ही रहे."

इस सब के बावजूद दक्षिण अफ़्रीका की टीम को हल्के फुल्के नहीं लिया जाना चाहिए, कहना है जर्मनी के फ़ुटबॉल गुरु फ़्रांत्स बेकेनबावर का. वह टूर्नामेंट में कुछ अचंभे पैदा करने की ताक़त रखती है जिसे पिछले साल कनफ़ेड कप के दौरान दिखाया भी जब बफ़ाना बफ़ाना सेमी फ़ाइनल तक पहुंची और तीसरे स्थान के लिए हुए मैच में यूरोपीय चैंपियन स्पेन से हारी. वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले दक्षिण अफ़्रीका की टीम 12 मैचों में अविजित रही है.

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