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दुनिया

वीडियो: हवा में मौत से सामना

हवाई जहाज को परिवहन का सबसे सुरक्षित जरिया माना जाता है. लेकिन फिर भी हवाई यात्रा में घबराहट तो बनी ही रहती है क्योंकि कभी कभार मौसम इस तरह से जान सांसत में डाल देता है.

मौसम अच्छा हो तो हवाई यात्रा के दौरान ऐसा लगता है जैसे जमीन पर ही आराम से कुर्सी पर बैठे हैं. बस थोड़ी आवाज आती रहती है. लेकिन अगर मौसम खराब हो तो हवाई यात्रा सांस फूला देती है. आए दिन सैकड़ों हवाई जहाज खराब मौसम का सामना करते हैं. आम तौर पर बादलों के पार जाने या ऊंचाई पर अचानक तूफान का सामना होने पर विमान भी हिचकोले खाने लगता है.

कभी कभार यह हिचकोले इतने ताकतवर होते हैं कि यात्रियों को अपना अंत दिखाई पड़ने लगता है. 2014 में दक्षिण कोरिया से अमेरिका जा रही एक फ्लाइट के यात्रियों के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. जापान के ऊपर विमान ने ऐसे हिचकोले खाये कि मुसाफिरों की चीख निकल गई. प्रार्थनाएं होने लगी. टरब्यूलेंस इतना तेज था कि ट्रॉलियां भी गिरने लगीं. पांच लोगों को चोट लगी और इलाज के लिए विमान को टोक्यो में ही लैंड करना पड़ा.

पायलट और क्रू मेम्बर ऐसे हिचकोलों का आए दिन सामना करते हैं. आधुनिक विमानों का ऑटो पायलट सिस्टम ऐसे मुश्किल हालात से आराम से निपट लेता है. जहाज झटके जरूर खाता है लेकिन ऑटो पायलट विमान की स्पीड, ऊंचाई और इंजन स्पीड को एडजस्ट करता हुआ खराब मौसम को पार कर जाता है.

लेकिन अगर मौसम बहुत ही खराब हो तो पायलटों को रडार पर उसका पता चल जाता है और वे दूसरा रूट लेते हैं. ट्रेनिंग में पायलटों को सिखाया जाता है कि वे बहुत खराब मौसम या ताकतवर तूफान में घुसने का जोखिम न उठाएं. लिहाजा जब कभी हवाई यात्रा के दौरान आप भी हिचकोलों से घबरायें, तो इस बात को याद रखें कि अनुभवी पायलट और बेहतरीन मशीन आपको सुरक्षित मंजिल तक पहुंचा देगी.

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