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दुनिया

वीजा विवाद पर अमेरिकी सीनेटर की सफाई

अमेरिकी सीनेटर चार्ल्स शूमर ने अपने उस बयान पर सफाई दी है जिसमें उन्होंने भारतीय आईटी कंपनियों को कार के पुर्जों का अवैध कारोबार करने वाली दुकान यानि चॉप शॉप कहा था. शूमर ने अपने उस बयान को गलत कहा है.

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इंफोसिस जैसी कई बड़ी कंपनियों पर बोझ बढ़ेगा

शूमर ने कहा है कि वह दरअसल आईटी कंपनियों को बॉडी शॉप कहना चाहते थे. शूमर ने कहा, " जिस तरह से ये कंपनियां एच-1बी वीज़ा का इस्तेमाल कर रही हैं, मैं पूरी तरह से उसके खिलाफ हूं. लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा अगर मेरे बयान का यह मतलब निकाला जाए कि ये कंपनियां गैरकानूनी तरीके अपना रही हैं."

साथ ही शूमर ने कहा कि वीज़ा फीस में इजाफे का मकसद किसी ख़ास देश की कंपनियों को निशाना बनाना नहीं है. उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि मीडिया में इसे भारतीय आईटी कंपनियों को निशाना बनाने की तरह देखा जा रहा है. उन्होंने कहा कि कोई भी कंपनी चाहे वह किसी देश की हो अगर एच-1बी वीज़ा का इस्तेमाल इस रूप में कर रही है जिसके लिए इसे नहीं बनाया गया तो उसे ज्यादा फीस देनी पड़ेगी.

शूमर ने कहा कि सिर्फ उन कंपनियों के लिए वीज़ा फीस बढ़ाई गई है जिनमें 50 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं और जिनके 50 फीसदी से ज्यादा कर्मचारी एच1बी वीज़ा पर काम कर रहे हैं. एच-1बी वीज़ा प्रोग्राम जब शुरू किया गया था तब कांग्रेस ने ऐसा नहीं सोचा था कि कंपनियां इसका इस रूप में इस्तेमाल करेंगी. कांग्रेस नहीं चाहती कि एच-1बी प्रोग्राम किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के निर्माण के लिए इस्तेमाल हो, जिसमें काम करने वाले कर्मचारियों को यह भी पता न हो कि वे किस शहर में किस प्रोजेक्ट के लिए काम करने जा रहे हैं.

अमेरिकी सीनेटर का कहना है कि अगर कोई कंपनी एच-1बी का इस्तेमाल नए उत्पाद और तकनीक के विकास के लिए करती हैं तो यह अच्छी बात है और कंपनी चाहे किसी देश की हो, इसका स्वागत किया जाएगा. लेकिन अगर को ई कंपनी एच-1बी वीज़ा का इस्तेमाल सिर्फ इसलिए कर रही हो कि एक नामी गिरामी बहुराष्ट्रीय कंपनी खड़ी की जा सके, तो उन्हें ज्यादा फीस देने के लिए तैयार रहना चाहिए.अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरी और एच-1बी वीज़ा प्रोग्राम के असल मसकद को बचाने के लिए फीस बढ़ाई गई है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः ए कुमार