विश्व नेताओं की चिंता परमाणु आतंकवाद | दुनिया | DW | 31.03.2016
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दुनिया

विश्व नेताओं की चिंता परमाणु आतंकवाद

वॉशिंगटन में हो रहे परमाणु सुरक्षा सम्मेलन में उत्तर कोरिया से परमाणु खतरे के अलावा इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों द्वारा परमाणु हथियार हासिल किए जाने की चिंता केंद्र में है.

जब से अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2009 में परमाणु अप्रसार को अपनी विदेशनीति का मुख्य हिस्सा बनाया है, वैश्विक परमाणु सुरक्षा पर लक्षित यह चौथा शिखर सम्मेलन है. इसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित करीब 50 देशों के राज्य व सरकार प्रमुख तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं. उनका मकसद परमाणु भंडारों के लिए खतरों को कम करना और उन्हें सुरक्षित बनाना है. वे इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकवादी संगठनों द्वारा विश्व भर में शहरी इलाकों को पहुंचने वाले खतरों की भी चर्चा करेंगे.

अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बेन रोड्स का कहना है कि सम्मेलन में परमाणु सामग्रियों को सुरक्षित करने के अलावा उनके आतंकवादियों के हाथों पकड़ने को रोकने के उपायों पर चर्चा होगी. उन्होंने कहा, "हमने इस बात के पर्याप्त सबूत देखे हैं कि इस्लामिक स्टे जैसे आतंकवादी संगठन निर्दोष मानव जीवन और अंतरराष्ट्रीय मानकों की कोई परवाह नहीं करते और यह प्रभावी अंतरराष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा नीति की जरूरत दोगुनी करता है." रोड्स ने कहा कि 2010 की पहली शिखर भेंट के बाद से परमाणु पदार्थों की सुरक्षा के लिए बहुत कुछ किया गया है जिसमें यूक्रेन और चिली सहित कई देशों में परमाणु सामग्रियों को कम करना या पूरी तरह खत्म करना शामिल है. करीब 3.8 टन परमाणु सामग्री जब्त की गई है, जो 150 बम बनाने के लिए काफी है.

सम्मेलन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति पाक गुइन हाय के साथ उत्तर कोरिया और दूसरी क्षेत्रीय समस्याओं पर बात करेंगे. बाद में ओबामा उत्तर कोरिया पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भी चर्चा करेंगे. इस साल के शुरू से ही कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव है, जब उत्तर कोरिया ने परमाणु और लंबी दूरी के रॉकेट का परीक्षण किया. शुक्रवार को ओबामा सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों और जर्मनी के साथ ईरान के साथ तय परमाणु संधि में हुई प्रगति पर चर्चा करेंगे. सम्मेलन में भाग लेने वाले नेता गुरुवार को पहली बार व्हाइट हाउस में डिनर पर मिलेंगे. बाकी चर्चा शुक्रवार को तीन प्लेनरी सत्रों में होगी.

परमाणु पदार्थों को आतंकवादियों के हाथों में जाने से रोकना ओबामा की मुख्य चिंता है. ओबामा की छह साल की कोशिशों के बावजूद अधिकारियों का कहना है कि डर्टी बम के लिए सामग्रियां सुरक्षित नहीं हैं. शीतयुद्ध के सालों के बाद महाशक्तियों के बीच परमाणु युद्ध के खतरे की जगह उत्तरी अफ्रीका, यमन और सउदी अरब में सक्रिय आतंकी संगठनों ने ले ली है जिनकी अब परमाणु हथियारों में दिलचस्पी है. एक विशेष सत्र में न्यूयॉर्क या लंदन जैसे शहरों में परमाणु हमले की संभावना पर चर्चा होगी. बैठक में भाग लेने वाले नेता परमाणु आतंकवाद की स्थिति में होने वाली घटनाओं की संभावना पर विचार करेंगे. रूस और पाकिस्तान के नेता सम्मेलन में भाग नहीं ले रहे हैं.

एमजे/आईबी (डीपीए, एपी)

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