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खेल

विश्व कप में बाल शोषण के खिलाफ लड़ाई

दुनिया भर के धार्मिक समूहों के एक अंतरराष्ट्रीय संगठन ने ब्राजील विश्व कप के दौरान मानव तस्करी और बाल यौनकर्म के खिलाफ मुहिम छेड़ने की घोषणा की है. दुनिया भर से आई ननों की इस अभियान में अहम हिस्सेदारी होगी.

बाल तस्करी और बाल यौनशोषण के खिलाफ इस मुहिम में 79 देशों की करीब 240 धार्मिक सभाओं के लोग शामिल हो रहे हैं. इस संगठन की आयोजक इटली की नन सिस्टर गाब्रिएला बोटनी का कहना है, "ब्राजील में हमारी सबसे बड़ी चिंता बाल यौन उत्पीड़न के बढ़ रहे मामलों से जुड़ी है." उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खेलों के आयोजन के दौरान मानव तस्करी जैसे मामले बढ़ना आम है. मानव तस्कर नौकरी ढूंढ रहे लोगों को रिझा कर उनसे बंधुआ मजदूरी कराते हैं और बच्चों का अपहरण करते हैं. इन बच्चों को वे या तो गैरकानूनी तरीके से गोद लेने वालों को दे देते हैं या फिर भीख मांगने पर मजबूर करते हैं.

बोटनी के मुताबिक जर्मनी के 2006 और दक्षिण अफ्रीका के 2010 फुटबॉल विश्व कप के दौरान बाल शोषण के मामलों में 30 से 40 फीसदी बढ़ोतरी हुई. 12 जून से ब्राजील में एक महीने तक चलने वाले विश्व कप में ऐसा एक बार फिर होने की आशंका है.

इस अभियान को 'प्ले फॉर लाइफ, रिपोर्ट ट्रैफिकिंग' नाम दिया गया है जिसका मतलब है 'जीवन के लिए खेलो, तस्करी की शिकायत करो.' इस अभियान में दुनिया भर से आई नन हिस्सा लेंगी. वे एयरपोर्ट पर और ब्राजील के अन्य पर्यटन इलाकों में लोगों को इस बारे में जागरूक करते पर्चे बांटेंगी. इन पर्चों पर छपा होगा कि अगर उन्हें कहीं भी बाल यौन उत्पीड़न का शक हो तो फौरन इस बारे में जानकारी दें.

इस अभियान में हिस्सा ले रहे संगठनों में से एक इंटरनेशनल यूनियन ऑफ सुपीरियर्स जनरल की निदेशक कार्मेन समुट ने कहा, "बिना जागरूकता के, मानव गरिमा के लिए एकजुट हो कर लड़े बगैर, विश्व कप फाइनल मानवता के लिए एक समारोह के बजाय बेहद शर्मनाक साबित हो सकता है." इस अभियान को छेड़ने वाले संगठनों के समूह का नाम तलिथा कुम है.

एसएफ/एजेए (एपी)

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