विवाद से बिगड़ न जाए पीएम का दौरा | दुनिया | DW | 26.04.2013
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

विवाद से बिगड़ न जाए पीएम का दौरा

चीन के प्रधानमंत्री को भारत आना है और सीमा पर विवाद छिड़ा है. चीन का दावा है सैनिक अपनी सीमा के भीतर हैं और भारत का कहना है कि चीनी 19 किमी अंदर घुसे हैं. विदेश मंत्री कह रहे हैं कि बहुत जल्द सब सुलझ जाएगा.

चीन के नए प्रधानमंत्री लि केकियांग खासतौर से भारत को अपनी पहली विदेश यात्रा की जमीन बनाना चाहते हैं. जानकारों की राय में ऐसा यह संदेश देने के लिए है कि उनका देश भारत के साथ रिश्तों को बेहतर बनाना चाहता है. पेकिंग यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के सेंटर फॉर आर्म्स कंट्रोल के निदेशक हान हुआ का कहना है कि मौजूदा विवाद की छाया कहीं प्रधानमंत्री के दौरे पर न पड़ जाए. आधिकारिक रूप से इसका एलान तो नहीं हुआ लेकिन अधिकारियों का कहना है कि लि सबसे पहले भारत जाना चाहते हैं. उम्मीद की जा रही है कि मई महीने में प्रधानमंत्री दिल्ली आएंगे.

इससे पहले भारतीय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद 9 मई को बीजिंग जा रहे हैं. हान हुआ ने चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स से कहा, "भारतीय मीडिया में चीनी सैनिकों के सीमा पार जाने की खबरें कोई नई बात नहीं हैं. हालांकि इस बार यह उचित समय पर सामने नहीं आई हैं और इस मामले में राजदूत को तलब किया जाना भी ठीक नहीं रहा." हान ने आशंका जताई है कि "शायद भारत मुश्किल पानी में मछली मारने की फिराक में हैं. चीन इस समय जापान के साथ द्वीपों पर विवाद में फंसा है."

चीन और भारत के बीच सीमा विवाद अंग्रेजी हुकूमत के इतिहास से जुड़ा है जिसकी पीड़ा दोनों ही मुल्कों को उठानी पड़ रही है. चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में रिसर्च कर रहे डोंग मान्युआन का कहना है कि दोनों देशों के सामने चुनौती फिलहाल अपने देश की अर्थव्यवस्था के विकास और उसकी तेज रफ्तार को कायम रखने की है. सीमा विवाद की बाधा इसके रास्ते में नहीं आनी चाहिए. हालांकि इसके साथ ही डोंग ने यह भी कहा, "हम सीमा विवादों के रातोंरात हल हो जाने की उम्मीद नहीं कर सकते. इसके लिए हमें धैर्य रखना होगा." डोंग का कहना है कि शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए विरोध को घटाना एक सही रास्ता है और चीन ने कई सीमा विवादों को इसके सहारे हल कर अच्छा अनुभव बटोरा है.

भारत के रक्षा मंत्री एके एंटनी भी कह रहे हैं कि कई स्तरों पर बातचीत चल रही है और जल्दी ही मामले का कोई शांतिपूर्ण हल निकाल लिया जाएगा. एक दिन पहले विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी जोर दे कर कहा कि भारत इसे ज्यादा तूल नहीं दे रहा है और 9 मई से उनकी प्रस्तावित चीन यात्रा के पहले इसे सुलझा लिया जाएगा. चीन ने सीमा पार जाने की खबरों से इनकार किया है और उसका कहना है कि उसके सैनिक वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार नहीं गए.

भारत के थल सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने उत्तरी कमान के सैन्य कमांडरों के साथ जम्मू कश्मीर और लद्दाख में स्थिति की समीक्षा करने के बाद रक्षा मंत्री को इस बारे में जानकारी दी. सेना ने सरकार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के नेतृत्व वाले चाइना स्टडी ग्रुप को मौजूद विकल्पों के बारे में भी जानकारी दी है. इसमें वर्तमान स्थिति को संभालने के लिए सेना का आक्रामक रुप से इस्तेमाल करना भी शामिल है. चाइना स्टडी ग्रुप को जितने भी उपाय सुझाए गए हैं उन सब की समीक्षा की जा रही है और साथ ही उनसे जुड़े विभागों ने भी अपने सुझाव दिए हैं. भारतीय सेना ने 5 लद्दाख स्काउट्स बटालियन से अपने सैनिकों को मोर्चे पर पहुंचा दिया है और उन्होंने वहां अपने खेमे गाड़ दिए हैं. सेना जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सैनिकों को भी वहां भेजने पर विचार कर रही है.

एनआर/ओएसजे (पीटीआई)

DW.COM

WWW-Links

संबंधित सामग्री