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विज्ञान

विवाद बढ़ने पर अलग हो जाते हैं चमगादड़

हितों का टकराव जितना तगड़ा होता है, समझौते की गुंजाइश उतनी ही कम होती जाती है. अक्सर यह बर्ताव इंसानों में पाया जाता है. अब जर्मनी और स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिकों ने यह बर्ताव चमगादड़ों में भी पाया है.

चमगादड़ों का भी विवाद की स्थिति में वही हाल होता है, जो बहुत से इंसानों का होता है. हितों पर विवाद के बाद वे सुलह करने की हालत में रहते हैं. जर्मन शहर ग्राइफ्सवाल्ड के जीवविज्ञानियों ने इसका पता लगाने के लिए जंगली चमगादड़ों के दस्ते में विवाद की नकली स्थिति पैदा की.

रात में जब चमगादड़ अगले दिन की अपनी रिहाइश का चुनाव करते हैं, तो उनमें से कुछ को शोर के संकेत दिए गए. रिसर्चरों ने चुनिंदा पक्षियों को बदल बदल कर संकेत दिया कि अगले दिन वो जगह उनके रहने के लायक नहीं हैं. यदि उड़ने के दौरान दिए गए संकेत बहुत तगड़े थे तो पक्षियों के दस्ते में हितों के टकराव का समाधान नहीं हो पाया. शोर से परेशान चमगादड़ रिसर्चरों के दल के प्रमुख जेराल्ड कैर्थ के अनुसार, "पक्षियों के दल ने कोई नई जगह खोज ली या एक दो दिन के लिए बंट गए."

ग्राइफ्सवाल्ड में हुए स्टडी के अनुसार भनभनाहट या कंपन जैसे कमजोर सिग्नल की स्थिति में चमगादड़ों के बीच सहमति होती देखी गई. इन परिस्थितियों में तंग किए गए पक्षी भी उस जगह पर जाने के लिए तैयार दिखे जहां दल का एक हिस्सा जाने को उपयुक्त मान रहा था. यहां हितों को लेकर टकराव की स्थिति नहीं थी. शोध के नतीजे को करंट बायोलॉजी के ताजा ऑनलाइन अंक में प्रकाशित किया गया है.

इस शोध के साथ पहली बार खुले में रहनेवाले पक्षियों पर यह साबित किया जा सका है कि दल का फैसला पक्षियों के बीच हितों के टकराव के आयाम पर निर्भर करता है. चमगादड़ों के लिए 15 से 40 की तादाद में एक जगह दिन बिताना सामान्य है. उन्हें एक जगह पर रहने से एक दूसरे को गर्माहट देने का फायदा मिलता है. "यदि दल के एक हिस्से में व्यक्तिगत नुकसान दलीय फायदे से बहुत ज्यादा होता है तो जत्थे में कुछ समय के विभाजन हो जाता है."

ग्राइफ्सवाल्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर चमगादड़ों और इंसान के बर्ताव में समानता पाते हैं. लेकिन कैर्थ का कहना है कि जंगली चमगादड़ों के विपरीत इंसान इस बात की कोशिश करता है कि हितों का टकराव बहुत बड़ा न हो जाए. पक्षी इस मामले में अलग होते हैं.

एमजे/एनआर (डीपीए)

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