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दुनिया

विरोध हुआ तो सिलेबस से हटी किताब

मुंबई यूनिवर्सिटी ने रोहिंटन मिस्त्री के उपन्यास 'सच अ लॉन्ग जर्नी' को अपने पाठ्यक्रम से हटाने का फैसला किया है. इसकी वजह से शिव सेना का विरोध. यह उपन्यास बुकर पुरस्कार के लिए नामांकित हो चुका है.

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शिव सेना नेता बाल ठाकरे

मुंबई विश्वविद्यालय में यह किताब 2007 से बीए (अंग्रेजी) के दूसरे साल के पाठ्यक्रम का हिस्सा है. लेकिन शिव सेना की युवा शाखा इस किताब का विरोध कर रही है. उसका कहना है कि इस किताब में भगवा पार्टी को गलत तरीके से पेश किया गया है.

भारतीय विद्यार्थी सेना के प्रमुख अभिजीत पांसे ने बताया, "इस उपन्यास में अश्लील और भद्दी भाषा का इस्तेमाल किया गया है. इसमें शिव सेना के विरोध में भी बातें लिखी गई हैं."

इस विरोध के आगे झुकते हुए मुंबई यूनिवर्सिटी ने किताब को पाठ्यक्रम से ही हटाने का फैसला कर लिया है. यूनिवर्सिटी के उप कुलपति रंजन वेलुकर ने बताया कि पिछले हफ्ते इस बारे में फैसला लिया गया. यूनिवर्सिटी ने संबद्ध कॉलेजों को इस फैसले की जानकारी दे दी है.

पांसे कहते हैं कि उप कुलपति ने हमारी बात समझते हुए इसे हटाने का फैसला किया है. उन्होंने कहा, "उप कुलपति ने हमारी बात समझी और अपना समर्थन भी दिया. उन्होंने फौरन इस बारे में वरिष्ठ स्टाफ सदस्यों की एक बैठक बुलाई और बाद में हमें सूचना दी कि किताब को सिलेबस से हटाने का फैसला किया गया है."

इस फैसले का असर छात्रों की पढ़ाई के साथ साथ अध्यापकों पर भी पड़ रहा है. कॉलेजों के अध्यापकों का कहना है कि बीए द्वीतीय वर्ष के लिए अंग्रेजी का पेपर तैयार किया जा चुका है लेकिन अब कॉलेजों को इसे कुछ देर के लिए टालना होगा.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः एमजी

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