वियतनाम युद्ध के 50 साल | दुनिया | DW | 04.08.2014
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दुनिया

वियतनाम युद्ध के 50 साल

पूरे 50 साल बीतने के बाद भी वियतनाम का युद्ध अमेरिका को सताता है. किन मुद्दों के आधार पर वियतनाम जंग शुरू की गई, इसे आज भी न्यायोचित नहीं ठहराया जा सका है. आधी सदी बाद भी सवाल बने हुए हैं.

युद्ध को आम तौर पर सही ठहराया भी नहीं जा सकता और तर्क से तो युद्ध नहीं लड़े जा सकते. 1955 में अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर और बाद में जॉन कैनेडी ने अपने सलाहकार दक्षिणी वियतनाम भेजे थे. विचार था कि इस इलाके को कम्युनिस्ट चीन के हाथों में पड़ने से रोका जाए. आइजनहावर की थ्योरी थी कि अगर इलाके का एक देश कम्युनिस्ट हुआ, तो कई देश उसके पीछे हो जाएंगे.

साल 1964 तक सीआईए और दूसरे स्रोतों से मिली जानकारी को ध्यान में रखते हुए अमेरिका ने उत्तरी और दक्षिणी वियतनाम में लुकी छिपी जंग शुरू कर दी. इन जगहों को रूस और चीन का समर्थन हासिल था. बाद में बड़ी सैनिक रणनीति तैयार की गई.

कैलिफोर्निया के सैन डियागो में थॉमस जैफरसन स्कूल ऑफ लॉ की प्रोफेसर और वियतनाम मामलों की जानकार मार्जोरी कोन का कहना है कि इसके बाद उन्हें सिर्फ इसे न्यायोचित ठहराने का एक बहाना चाहिए था. यह बहाना टोंकिन की खाड़ी की घटना से मिल गया. चार अगस्त, 1964 को अमेरिकी पोत इस खाड़ी में अंतरराष्ट्रीय जलसीमा में था. उसका कहना है कि तभी उत्तरी वियतनाम से उस पर हमला हुआ. हालांकि इसके सबूत पक्के नहीं थे. इससे दो दिन पहले ही दो अगस्त को अमेरिकी पोत मैडडॉक्स की वियतनाम की सेना से झड़प हुई थी.

आनन फानन प्रस्ताव

अगले ही दिन अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने उत्तरी वियतनाम पर हवाई हमले का आदेश दे दिया. अमेरिकी संसद ने सात अगस्त को टोंकिन की खाड़ी का प्रस्ताव पास कर दिया. इसके बाद 10 अगस्त को जॉनसन ने एक कानून पर दस्तखत किए, जिसके तहत उन्हें युद्ध का एलान किए बगैर ज्यादा कुछ करने का अधिकार मिल गया था.

अमेरिका के कुछ अधिकारी इस बात से इनकार करते हैं कि मैडडॉक्स पर हमला हुआ था. हालांकि वे इसके बाद भी 20 साल तक खामोश रहे. इसके बाद वियतनाम में युद्धबंदी रह चुके नौसेना पायलट एडमिरल जेम्स स्टॉकडेल ने खुलासा किया कि चार अगस्त को टोंकिन के ऊपर से उड़ते हुए उन्हें नहीं लगा कि हमला हुआ था.

दक्षिण पूर्व एशिया के जानकार कार्ल डब्ल्यू बेकर का कहना है कि यह तोड़ मरो़ड़ कर दी गई सूचना थी, "टोंकिन प्रस्ताव को पास कराने में कई राजनीतिक लाभ थे." उनका दावा है कि राष्ट्रपति को भी पता था कि सबूत पक्के नहीं हैं. जमीन पर 1965 में युद्ध तेज हुआ और 1969 में चरम पर पहुंचा. उस समय तक करीब साढ़े पांच लाख सैनिक इसमें शामिल हो चुके थे. 10 साल की लड़ाई और 58,000 अमेरिकी सैनिकों के मरने के बाद 30 अप्रैल 1975 को साइगोन (हो-ची मिन्ह सिटी) पर वियतनाम का कब्जा हो गया.

वियतनाम सिंड्रोम

अमेरिका ने इसके बाद आनन फानन में अपने सैनिकों को वहां से हटा लिया और वियतनाम युद्ध खत्म घोषित कर दिया गया. 1965 के बाद से ही अमेरिका में इस युद्ध पर शक किया जाने लगा. तब तक टेलीविजन पर कई चीजों का प्रसारण शुरू हो चुका था और लोगों में इस युद्ध को लेकर ज्यादा सवाल उठ रहे थे. इसके बाद वियतनाम सिंड्रोम की भी खूब चर्चा हुई, जिसका मोटे तौर पर अर्थ वियतनाम में अमेरिका की नाकामी है.

15 साल तक अमेरिका खामोश रहा और उसके बाद 1990 के दशक में उसने इराक में सेना भेजी. कुवैत से इराकी सेना को खदेड़ने के बाद उस वक्त के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश (सीनियर) ने कहा, "कसम से, हमने वियतनाम सिंड्रोम को हमेशा के लिए हरा दिया है." लेकिन यह सच में खत्म नहीं हुआ है. हाल में इराक की घटनाओं को देखते हुए जब अमेरिका पर सैनिकों को वहां भेजने का दबाव बना, तो उसने सिर्फ सलाहकारों को भेजा. आधी सदी के बाद भी वियतनाम का युद्ध अमेरिका को सताता है.

एजेए/एमजे (डीपीए)

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