1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

विमान खोजने का ठेका मिलेगा

आठ देशों की सरकारों के लगातार प्रयास के बाद अब मलेशियाई विमान के मलबे की तलाश के लिए निजी कंपनियों की मदद ली जाएगी. सात हफ्तों के बाद भी लापता विमान का कुछ पता नहीं चल पाया है.

करीब 45 लाख वर्ग किलोमीटर के इलाके में तलाशी के बाद ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबॉट का कहना है, "मुझे यह कहते हुए निराशा हो रही है कि वायु, ऊपरी तल और समुद्र के अंदर अभी कुछ नहीं मिला है. अब इस बात की संभावना बहुत कम है कि हमें समुद्र के ऊपरी तल पर कुछ मिले." एबॉट के मुताबिक, "इतने दिन में हर चीज डूब जाती है."

कंपनी को मिलेगा काम

उपग्रह के चित्रों और आंकड़ों से खोज के इलाके की पहचान की गई है. खोज के दौरान ऑटोमेटिक पनडुब्बी ब्लूफिन-21 पर काफी भरोसा था लेकिन इससे भी कोई नतीजा नहीं निकल पाया. ऑस्ट्रेलिया की सरकार का कहना है कि मलेशिया के साथ मिल कर अब वे यह काम निजी कंपनी को देने की सोच रहे हैं. उनका अनुमान है कि इसमें छह करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर खर्च होंगे और छह से आठ महीने का वक्त लगेगा.

खोज अभियान में मदद कर रहे ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एबॉट का कहना है कि तलाशी अभियान अब नए दौर में प्रवेश कर रहा है और तलाशी दल के लोग समुद्र के भीतर उसके तल में करीब 60,000 वर्ग किलोमीटर के दायरे में तलाशी करेंगे, "अगर जरूरत पड़ी तो 700 किलोमीटर लंबे और 80 किलोमीटर चौड़े इलाके में."

अपना अपना खर्च

आठ मार्च को मलेशिया की राजधानी क्वालालंपुर से चीन की राजधानी बीजिंग के लिए उड़ान भरने के बाद मलेशियाई एयरलाइंस का बोइंग 777 विमान लापता हो गया. कुछ देर बाद इसका संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल से कट गया और उसके बाद से विमान के बारे में कोई सूचना नहीं है. बाद में ऑस्ट्रेलिया और चीन के उपग्रह की तस्वीरों को देख कर अनुमान लगाया गया कि विमान शायद हिन्द महासागर के ऊपर उड़ता रहा और बाद में हादसे का शिकार हो गया. हालांकि लंबी तलाशी के बाद भी इसका कुछ पता नहीं चल पाया.

अब तक ऑस्ट्रेलिया सहित आठ देश न्यूजीलैंड, मलेशिया, जापान, कोरिया, अमेरिका, ब्रिटेन और चीन इस खोजी अभियान में लगे थे और हर कोई अपना खर्च खुद उठा रहा था. लेकिन ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री का कहना है कि अगले दौर के लिए वह उम्मीद करेंगे कि लोग पैसे जमा करें, "इस काम में लगे दूसरे देशों से भी हम मदद की उम्मीद करेंगे. लेकिन हम इस बात का भरोसा भी देते हैं कि खोज का काम चलता रहेगा."

MH 370 Suche 17.04.2014

विमान खोजने में लगी ऑटोमेटिक पनडुब्बी ब्लूफिन-21

उम्मीद पर दुनिया

एक तरफ जहां हिन्द महासागर में खोज चलती रहेगी, वहीं दूसरी तरफ क्वालालंपुर, चीन, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका के एक्सपर्ट एक टीम बना कर तय करेंगे कि खोज कहां करनी है. प्रधानमंत्री एबॉट का कहना है, "हम उस टीम के पास दोबारा जाने वाले हैं और पूछने वाले हैं कि वे हमें सलाह दें." उनका कहना है कि एक्सपर्ट अभी भी मान रहे हैं कि उन्हें ब्लैक बॉक्स से सिग्नल मिले हैं और अगर वहां से कुछ नहीं मिला, तो बहुत हताशा और निराशा होगी, "विमान कहीं न कहीं तो होगा. वह गायब तो नहीं हो सकता है. हम नहीं चाहते कि यह अनिश्चितता हमेशा बनी रहे."

और उधर, उन लोगों की भी कमी नहीं, जो अब उम्मीद लगाए बैठे हैं. 60 साल के सलामत उमर का 29 साल का बेटा खैरुल अमरी सलामत भी विमान में सवार था. सलामत उम्मीद और नाउम्मीदी के बीच झूल रहे हैं, "अगर पानी में कुछ नहीं मिलता है, तो कहीं और खोज होनी चाहिए. अगर क्रैश नहीं हुआ है, तो यह भी तो हो सकता है कि मेरा बेटा जिंदा हो."

एजेए/आईबी (एएफपी)

DW.COM

संबंधित सामग्री