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दुनिया

विमानन उद्योग की उड़ान में सुविधाओं का अडंगा

भारत की बजट एयरलाइंस इंडिगो की तरफ से हाल में एयरबस को दिए गए 15 अरब डॉलर के ऑर्डर की इन दिनों हर तरफ चर्चा है. लेकिन देश में ज्यादातार एयरपोर्टों की खस्ता हालत और लचर सुविधाएं एवियशन इंडस्ट्री के पर कतर सकती हैं.

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2005 में बनी इंडिगो ने बुधवार को यह एलान कर दुनिया भर के मीडिया में सुर्खियां बटोरी कि वह 180 नए विमान खरीदने जा रही है और इसके लिए यूरोपीय विमान निर्माता कंपनी एयरबस से 15 अरब डॉलर का करार किया गया है. यह एयरबस से एक ही ऑर्डर में खरीदे जाने वाले सबसे ज्यादा विमान होंगे. फ्रांस में एयरबस से डील करने के बाद इंडिगो के मुखिया आदित्य घोष ने कहा, "जहां संभावना है, हम वहां पैसा लगा रहे हैं. अगर देश में 9 से 10 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि होगी तो एयरलाइंस बिजेनस को भी इसका फायदा मिलेगा." निजी क्षेत्र की एयरलाइंस इंडिगो तेजी से बढ़ रही है.

भारत में आर्थिक प्रगति के चलते करोड़ों लोग मिडल क्लास का हिस्सा बन रहे हैं जिनकी खर्च करने की ताकत तेजी से बढ़ रही है. किसी जमाने में लंबी यात्रा करने के लिए आपको घंटों ट्रेन के मुश्किल सफर से गुजरना होता था, लेकिन एयरलाइन उद्योग के उदारीकरण और सस्ते किरायों की वजह से लोग अब नए विकल्प भी चुनने लगे हैं. हालांकि अब भी कई क्षेत्रों में देश को गंभीर मुश्किलों का सामना है.

एयलाइन उद्योग की उड़ान

नवंबर में जारी आंकड़ों के मुताबिक इंडिगो भारत की तीसरी सबसे बड़ी एयरलाइन है, जिससे एक महीने में 8,36,000 लोगों ने सफर किया. इस मामले में पहले नंबर पर जेट और दूसरे पर किंगफिशर हैं. सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया का नंबर इन सबके बाद कहीं आता है.

देश में एविएशन सेक्टर में आते रहे बूम के रास्ते में कई चुनौती भी मौजूद हैं. कई एयरलाइसों की तरफ से पहले की कई अति महत्वकांक्षी योजनाओं का नतीजा खासा अफसोसनाक रहा है. 2009 में तेल के बढ़ते दामों और आर्थिक मंदी की वजह से बड़ा घाटा झेलने वाली किंगफिशर, जेट और दूसरी एयरलाइंसें सरकार से आर्थिक मदद हासिल करने में नाकाम रहीं.

अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग की भारतीय गतिविधियों के प्रमुख दिनेश केसकर कहते हैं, "लगातार सफलता आपूर्ति और मांग के संतुलन पर निर्भर करेगी. दो साल पहले यात्रियों की संख्या कम थी और उसके मुकालबे एयरलाइंस कहीं ज्यादा. अब किराए उस स्तर पर है कि एयरलाइंस मुनाफा कमा सकती हैं." भारतीय अर्थव्यवस्था ने मंदी से उबरते हुए अपनी सामान्य 8 से 9 प्रतिशत की सालाना आर्थिक वृद्धि हासिल कर दी है. अब कहीं ज्यादा लोग हवाई सफर कर रहे हैं और एयरलाइंस भी अपने टिकट महंगे कर रही हैं.

सुविधाओं की कमी

वहीं देश के हवाई अड्डों पर पर्याप्त सुविधाएं न होना लगातार चिंता का विषय बना हुआ है. मुंबई में फॉर्च्यून इक्विटी ब्रोकर से जुड़े महंतेश सबरद कहते हैं, "हवाई यातायात की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने का यह मतलब नहीं है कि आप बस नए विमान खरीद लें. अगर बड़े एयरपोर्ट बनाने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता तो इंडिगो की अपनी योजना पर ध्यान देना होगा."

दिल्ली में पिछले साल जुलाई में 2.7 अरब डॉलर की लागत से नया टर्मिनल बनाया गया, लेकिन मुंबई का इकलौता एयरपोर्ट जरूरत से ज्यादा भीड़भाड़ का शिकार रहा है. उसके तीन तरफ तो झुग्गी बस्तियां ही बसी हुई हैं. पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं, लोगों को दूसरी जगहों पर बसाने की दिक्कतें, भ्रष्टाचार, सुस्त कानून कार्यवाही और भूमि अधिग्रहण के लचर नियमों की वजह से मुंबई में दूसरा एयरपोर्ट बनाने की योजना पिछले 10 साल से लटकी पड़ी थी. नवंबर में दूसरा एयरपोर्ट बनाने की मंजूरी आखिरकार मिल गई.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः ओ सिंह

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