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डीडब्ल्यू अड्डा

विफल रहा भारत आयोजन की परीक्षा में

जर्मन मीडिया में इस सप्ताह कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन पर रिपोर्टें विरोधाभासी रहीं. कुछ अखबारों ने आयोजनों के दुःस्वप्न बनने की भविष्यवाणी की तो कुछ ने कहा कि भारत वयस्कता टेस्ट में विफल रहा है.

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पिछले रविवार को नई दिल्ली में 19वें कॉमनवेल्थ गेम्स का उद्घाटन हुआ. नौए ज्यूरिषर त्साइटुंग का कहना है कि खेलों का आयोजन भारत के लिए नई आर्थिक सत्ता के रूप में कमिंग आउट होता लेकिन उसके दुःस्वप्न में बदलने के आसार हैं. कुछ सप्ताह पहले तक उसे टालने या स्थगित करने की अटकलें लग रही थी. अखबार लिखता है

भारतीय राजनीतिज्ञों और खेल अधिकारियों ने जोरदार दावा किया था कि नई दिल्ली में सब कुछ बीजिंग के 2008 ओलंपिक से बहुत बेहतर होगा. लेकिन अपनी बड़बोली हेकड़ी के लिए भारत को पिछले सप्ताहों और महीनों में ऊंची कीमत चुकानी पड़ी है. कोई संदेह नहीं कि भारत ने हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठा खोई है. नई दिल्ली में उदासीन और फैसला लेने में कमजोर नौकरशाह तथा अयोग्य भारतीय और विदेशी खेल अधिकारी उस परीक्षा में विफल रहे हैं, जो भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स कराने की जिम्मेदारी लेने के साथ देनी थी.

Flash-Galerie Indien Commonwealth Games Delhi 2010

बर्लिन से प्रकाशित टागेस्शपीगेल का कहना है कि कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजक भारत सिर्फ ख्याति की चकाचौंध में नहीं इतराएगा, भारत का खेल धूल चाट रहा है. अखबार आगे लिखता है

भारत में खिलाड़ियों की बड़ी मुसीबत है, क्रिकेट के अलावा. लगभग सब कुछ इसी खेल के इर्द गिर्द चक्कर काटता है जिसका आयात ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों ने किया था. दूसरे खेलों के एथीलीट बहुत हुआ तो वार्षिक मेले का आकर्षण बनते हैं. जैसे मैराथन का वंडर चाइल्ड बुधिया सिंह. एक जूडो ट्रेनर द्वारा चुने गए और स्लम में रहने वाले बुधिया ने 2005 में सुर्खियां बटोरी क्योंकि वह संदिग्ध रूप से तीन साल की उम्र में 60 किलोमीटर दौड़ जाता था. बाद में अधिकारियों ने बच्चे के उत्पीड़न को बंद कराया. ट्रेनर पर बुधिया से जबरदस्ती करने का आरोप था. ऐसे में संदेहास्पद ट्रेनरों को आसानी होती है क्योंकि भारत में शायद ही खेल संगठनों की संरचना मौजूद है.

Indien Commonwealth Spiele Flash-Galerie

हर रविवार को फ्रैंकफुर्ट से छपने वाले फ्रांकफुर्टर अलगेमाइने जोंटाग्ससाइटुंग ने लिखा कि कॉमनवेल्थ गेम्स स्थगित होने के कगार पर था, लेकिन फिर भारत ने कमर कस ली, लेकिन अब आतंकवादी हमलों का खतरा है. साप्ताहिक अखबार लिखता है

भारत के शांत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ब्रेक लगाया, और खेलों को बचाने के लिए आयोजन के मुख्य भागीदारों को शांत रहने, मिलजुलकर काम करने और भारत के अंतिम समय में काम करने की प्रतिभा का उपयोग करने के आदेश दिए. सौ रुपए की दैनिक मजदूरी ने सफाई कर्मचारियों की सेना को स्टेडियमों में भेजने में मदद दी. पुलिस वालों ने स्लमों को हटाया और उस बीच ऑस्ट्रेलिया की टेलिविजन कंपनी टेन अपनी आपात बैठकों में इस पर विचार कर रही थी कि यदि खेल नहीं हुए तो वे क्या प्रसारण करेंगे.

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